शिंदे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे लेकिन बाल ठाकरे की विचारधारा से समझौता होते देख उन्हें बगावत करनी पड़ी। शिंदे जून 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग हो गए थे और उन्होंने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई। उन्होंने कहा कि मैं सीएम हूं, फिर भी एक कार्यकर्ता के तौर पर काम करता हूं। हमारी पार्टी में कोई मालिक या नौकर नहीं है। हम सभी एक-दूसरे के सहयोग से काम कर रहे हैं। राजा का बेटा राजा नहीं बनता, जो काम करेगा, वही राजा बनेगा। बालासाहेब ठाकरे अपने सहयोगियों को दोस्त मानते थे, लेकिन उद्धव ने हमें घरेलू नौकर माना। कोई पार्टी या राज्य कभी भी घर बैठकर नहीं चलाया जा सकता।
उन्होंने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देने की अपील की। शिंदे ने कहा, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) का विकास का कोई एजेंडा या इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे पर फैसला दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा। महायुति विदर्भ में सभी सीट पर जीत दर्ज करेगी।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे के बयान पर पलटवार करते हुए शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सहयोगियों को चार से पांच सीट दीं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके बेटे को कल्याण से फिर से नामांकित किया जाए। शिंदे ने कहा कि इस तरह की आलोचना के साथ आने वालों को एमवीए के झगड़े को देखना चाहिए।