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I.N.D.I. Alliance: यूपी के लिए सीट शेयरिंग में गठबंधन का 'फॉर्मूला 21', करीब-करीब सब कुछ हुआ तय!

आशीष तिवारी
Updated Tue, 19 Dec 2023 08:03 PM IST

सार

बैठक में शामिल सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे चार प्रमुख राज्यों में सीट शेयरिंग को लेकर भी चर्चा हुई है। हालांकि इस बैठक में सीट बंटवारे पर किसी भी तरीके की तल्खी और कड़ा रुख नहीं देखा गया...
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I.N.D.I.A Alliance - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar


समाजवादी पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है की सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस पार्टी या अन्य दलों के साथ ना कोई तल्खी है और न ही कोई अडिगता है। यही वजह है की सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर किसी भी तरीके का कोई विवाद नहीं होने वाला है। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश में सीटों के फॉर्मूले को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक तकरीबन सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर सहमति बन चुकी है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उनकी ओर से भी कोई ऐसी नाजायज सीट शेयरिंग की डिमांड नहीं की जा रही है, जिस पर समाजवादी पार्टी को कोई आपत्ति हो। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस किसी भी तरीके का नाजायज दबाव डालकर सीट बंटवारे की बात नहीं करेगी। पार्टी से जुड़े सूत्र मानते हैं कि जो सीट शेयरिंग का "फॉर्मूला 21" चर्चा में आया है। अगर सब कुछ सही रहा तो इसी पैटर्न पर सीटों का बंटवारा हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश के अलावा सीटों में पंजाब, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में भी शेयरिंग के फॉर्मूले पर पेंच फंसा हुआ है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में मौजूद पार्टी के प्रमुख नेताओं की तरफ से सबसे पहले राज्य स्तर पर सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को समझकर आगे बढ़ने का मसौदा पेश किया गया। तय यही हुआ कि सभी राज्य अपने-अपने स्तर पर पहले सीटों के फॉर्मूले को राज्य स्तर पर ही आगे बढ़ाएं। उसके बाद 31 दिसंबर तक सीटों के शेयरिंग फॉर्मूले को लागू कर दिया जाए। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कहते हैं कि जिन राज्यों में सीट शेयरिंग को लेकर कुछ पेचीदगियां हैं उन पर चर्चा हुई है। जो भी समस्याएं हैं उनको दूर कर जल्द ही चुनाव में जाने की तैयारी की जाएगी।

बैठक में शामिल सूत्रों के मुताबिक सोमवार को हुई बैठक में चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई है। इसमें प्रमुख और महत्वपूर्ण मुद्दा संसद के भीतर हुई सुरक्षा की चूक का रहा। इसके अलावा इस बैठक में सांसदों की लगातार निलंबन की प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी भी जताई गई, उस पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान तय हुआ कि गठबंधन में शामिल सभी दल केंद्र सरकार की नाकामियों और उनके रवैये का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध करेंगे। इसके लिए बाकायदा अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियों और नेताओं को जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। इसके अलावा महत्वपूर्ण मुद्दा प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर के भी रहा। सूत्रों की मानें तो टीएमसी ने प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर खरगे के नाम की चर्चा की। हालांकि आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री के चेहरे पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

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