ध्वनि प्रदूषण मानव ही नहीं जीव-जंतुओं पर भी डाल रहा है असर
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने अमर उजाला को बताया कि शहरों में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण वाहनों के कारण होता है। शहरों में लगातार औद्योगिक इकाइयां चलती रहती हैं इससे प्रदूषण लगातार बना ही रहता है। वहीं आज के दौर में डीजे, आतिशबाजी के कारण भी प्रदूषण शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार इसे कम करने के लिए कई कोशिश कर रही है, लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। सरकार को शहरों में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी और सख्ती से करनी चाहिए। वहीं लोगों को भी इसके बारे में जागरुक करना चाहिए। आज लोगों को इसके मानकों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
चंडीगढ़ पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ रविंद्र खाईवाल ने बताया कि शहरों में ध्वनि प्रदूषण का बढ़ता स्तर मानव जीवन में बहुत ज्यादा असर डाल रहा है। इससे इंसान की श्रवण क्षमता को हानि पहुंच रही है। तेज ध्वनि मानव ही नहीं जीव-जंतुओं के जीवन पर भी बुरा असर डाल रही है। ध्वनि प्रदूषण के कारण लोग सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, हाई ब्लड प्रेशर, बेचैनी, सुनने की शक्ति कम होना, नींद कम हो जाना, याद्दाश्त कम होना जैसी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं।
क्या है सामान्य ध्वनि का स्तर
दिन के वक्त आवासीय क्षेत्रों में 55 डेसीबल ध्वनि सामान्य मानी गई है, औद्योगिक क्षेत्रों में 75 डेसीबल ध्वनि, व्यावसायिक क्षेत्रों में 65 डेसीबल ध्वनि और शांत क्षेत्र में 50 डेसीबल सामान्य होती है। वहीं रात के समय में आवासीय क्षेत्रों में 45 डेसीबल ध्वनि सामान्य मानी गई है, औद्योगिक क्षेत्र में 70 डेसीबल ध्वनि, व्यावसायिक क्षेत्रों में 55 डेसीबल ध्वनि और शांत क्षेत्र में 40 डेसीबल सामान्य होती है।
ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर चालान काटने का प्रावधान
एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर चालान की कार्रवाई का नियम है। ये कार्रवाई केवल गाड़ियों के लिए नहीं बल्कि तेज़ आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर भी है। अगर कोई व्यक्ति या संस्था धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में रात 10 बजे से रात 12 बजे तक अगर लाउडस्पीकर या तेज म्यूजिक वाला डीजे बजाना चाहता है तो इसके लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
ये हैं नियम
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर्स, ऊंची आवाज में संगीत और ड्रम का इस्तेमाल गैरकानूनी है।
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर बजाना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन।
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच खुली जगहों पर लाउडस्पीकर या म्यूजिक बजाना एक दंडनीय अपराध है।
- साइलेंस जोन जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान और अदालतों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी वजह से शोर 50 डेसिबल से ज्यादा का नहीं होना चाहिए।
एक सामान्य व्यक्ति 0 डेसिबल तक की आवाज सुन सकता है
डब्ल्यूएचओ का मानना है कि रात में 40 डेसिबल से ज्यादा की आवाज और दिन में 80 डेसिबल से ज्यादा की आवाज़ शरीर के साथ साथ मन पर भी विपरित असर डालती है। ध्वनि प्रदूषण को मापने का पैमाना डेसिबल होता है। एक सामान्य व्यक्ति 0 डेसिबल तक की आवाज आसानी से सुन सकता है। ये आवाज पेड़ के पत्तों की सरसराहट जितनी होती है। आमतौर पर घर में जो लोग बात करते हैं वह 30 डेसिबल के आसपास होती है। वहीं 85 डेसिबल से ज्यादा की आवाज लोगों के कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। 100 डेसिबल की आवाजज को लगातार 15 मिनट तक लगातार सुनने से व्यक्ति के कान खराब होने या कान का पर्दा फटने का खतरा हो सकता है।