1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विश्व धर्म संसद में एक प्रतिष्ठित भाषण दिया था। इसके जरिये उन्होंने दुनिया को हिंदू धर्म के गहन ज्ञान से परिचित कराया। इस संबोधन के बाद उन्हें भारतीय ज्ञान के दूत और ईश्वरीय अधिकार के वक्ता की उपाधि दी गई।
शिकागो की धर्म संसद में 131 साल पहले दिए गए स्वामी विवेकानंद के भाषण का विश्व रिकॉर्ड बना। पुणे के जीडी मडगुलकर ऑडिटोरियम में जांबवंत फाउंडेशन और पार्टेक्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम के सैकड़ों लोगों ने एक साथ स्वामी विवेकानंद का भाषण पढ़ा। इस दौरान सभी ने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इससे पहले पैनल चर्चा में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के बारे में जानकारी दी। अमर उजाला के यूट्यूब चैनल के जरिये लोगों ने कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा।
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1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विश्व धर्म संसद में एक प्रतिष्ठित भाषण दिया था। इसके जरिये उन्होंने दुनिया को हिंदू धर्म के गहन ज्ञान से परिचित कराया। इस संबोधन के बाद उन्हें भारतीय ज्ञान के दूत और ईश्वरीय अधिकार के वक्ता की उपाधि दी गई। स्वामी विवेकानंद के भाषण की बदौलत वैश्विक धर्मों के बीच हिंदू धर्म की स्थिति में वृद्धि हुई। इस भाषण की 131वीं वर्षगांठ पर जांबवंत फाउंडेशन ने मैं विवेकानंद हूं अभियान के तहत बड़ी पहल की।
बुधवार सुबह से कार्यक्रम की शृंखला शुरू हुई। सुबह ओंकारेश्वर मंदिर में एक पवित्र रुद्राभिषेक समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद जीडी मडगुलकर सभागार में ध्यान और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को लेकर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं की आज के दौर में प्रासंगिकता के बारे में बताया।
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इसके बाद सभागार में मौजूद सैकड़ों लोगों ने एक साथ स्वामी विवेकानंद का शिकागो में दिया गया भाषण पढ़ा। सभी लोग स्वामी विवेकानंद की पोशाक पहने हुए थे। इस मौके पर सभी ने सामाजिक उत्थान और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का भाषण आज भी एकता और सद्भाव के अपने शक्तिशाली संदेश के साथ गहराई से गूंजता है और दुनिया भर में अनगिनत व्यक्तियों को प्रेरणा दे रहा है।