सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार को 24 साल पहले मकान मालकिन को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को बरी किया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि इंसानी दिमाग एक पहेली है और किसी पुरुष या महिला की आत्महत्या के लिए अनगिनत कारण हो सकते हैं।
न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ मामले में सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा सुनवाई में कहा, हमेशा ऐसा नहीं हो सकता है कि किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना और मृतक के आसपास की परिस्थितियां ही आत्महत्या की वजहें हों।
पीठ ने कहा, इंसान का मन एक पहेली है। इसके रहस्य को उजागर करना असंभव है। किसी पुरुष या महिला के आत्महत्या करने या आत्महत्या के प्रयास करने के पीछे असंख्य कारण हो सकते हैं। जैसे अकादमिक ऊंचाईयां हासिल करने में विफलता, कॉलेज या छात्रावास में दमकनकारी माहौल, बेरोजगारी, वित्तीय परेशानियां, प्रेम या विवाह में निराशा, तीव्र या पुरानी बीमारियां, अवसाद आदि।
इस मामले में महिला (पूर्व मकान मालकिन) अपनी बहन के बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद लौट रही थी, तभी आदमी (पू्र्व किरायेदार) ने उसे शादी के लिए पेशकश की। इसके बाद व्यक्ति ने उसे धमकी दी कि अग वह उससे शादी करने के लिए सहमत नहीं हुई तो वह उसकी बहनों के परिवारों को तबाह कर देगा और उनकी इज्जत उतार देगा और उन्हें मार डालेगा।
घर पहुंचने पर महिला ने अपनी बहनों को फोन पर घटना की जानकारी दी। इसके बाद उसने घर में जहर खा लिया था। इसके महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां छह जुलाई 200 को उसकी मौत हो गई। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिसके आधार पर वह अपीलकर्ता को मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहरा सके।
अदालत ने कहा, एक महिला की मौत निश्चित रूप से बेहद दुख है। लेकिन यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि आत्महत्या के लिए उकसाने की बात साबित हो गई है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित करने में विफल रहा है।