केरल के भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दुर्भावनापूर्ण मकसद से पुलिस को दी गई पुस्तिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया है। यदि वामपंथी सरकार का सभी तीर्थयात्रियों के लिए प्रवेश संबंधी निर्देश के पीछे कोई विशेष इरादा है, तो बेहतर होगा इसे शुरुआती स्तर पर ही खत्म कर दिया जाए।
सबरीमाला मंदिर में वार्षिक पूजा उत्सव (मंडलम मकरविलक्कू) शुरू होते ही हंगामा खड़ा हो गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि केरल की वामपंथी सरकार जानबूझकर विवाद खड़ा करना चाहती है।असल में राज्य के गृह मंत्रालय ने मंदिर पर तैनात किए गए पुलिसकर्मियों को एक आचरण पुस्तिका दी है, जिसमें लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2018 के आदेश के मुताबिक सभी तीर्थयात्रियों को प्रवेश करने दिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी, जबकि पारंपरिक तौर पर मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता है।
भाजपा के आरोपों पर सरकार ने दिया जवाब
केरल के भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दुर्भावनापूर्ण मकसद से पुलिस को दी गई पुस्तिका में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया है। यदि वामपंथी सरकार का सभी तीर्थयात्रियों के लिए प्रवेश संबंधी निर्देश के पीछे कोई विशेष इरादा है, तो बेहतर होगा इसे शुरुआती स्तर पर ही खत्म कर दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि अगर सरकार मंदिर को फिर से युद्ध क्षेत्र बनाना और लोगों की भावनाओं को भड़काना चाहती है तो बता दें कि अभी हम कुछ भी नहीं भूले हैं। सरकार को भी याद होगा कि आखिर में उसे पीछे हटना पड़ा था। भाजपा के आरोपों पर जवाब देते हुए राज्य के देवास्वोम मंत्री के राधाकृष्णनन ने कहा कि सरकार ने कुछ भी दुर्भावना के साथ नहीं किया है। यदि निर्देशों में कोई चूक हुई है तो इसे वापस लेने के निर्देश दिए जाएंगे।