आजकल देश-विदेश से उड़ानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने लगी हैं। कभी यात्री आपस में लड़ जाते हैं, तो कभी विमान ही आपस में भिड़ जाने से बच जाते हैं। दरअसल, पिछले साल नवंबर में दो विमानों के बीच तय मानक से कम दूरी के बीच उड़ान भरने का मामला सामने आया है। दोनों विमान इंडिगो के हैं। इस घटना की जांच खुद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) कर रहा है।
एएआईबी की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें कहा गया है कि दोनों विमानों ने अलग-अलग रनवे से उड़ान भरी थी, लेकिन एक अपने मार्ग से भटक गया, जिसकी वजह से टकराव की स्थिती बन गई थी। हालांकि, ट्रैफिक अलर्ट और टकराव से बचाव प्रणाली (टीसीएएस) सक्रिय हो गई थी। साथ ही विमान भी टकराव से बचने के लिए सक्षम थे।
यह हुई गलती
बताया जा रहा है कि पिछले साल 17 नवंबर को एयरबस A321 और A320 हैदराबाद और रायपुर के लिए उड़ान भरने वाले थे। दोपहर करीब 12 बजकर 31 मिनट पर A321 को रनवे 27 से उड़ान भरना था। लेकिन वह अपने मार्ग से भटककर रनवे 29R की ओर चला गया। दूसरी तरफ उसी समय रायपुर जा रहे विमान के पायलटों को हवाई यातायात नियंत्रक से रनवे 29R से प्रस्थान करने की मंजूरी दे दी। दूसरे विमान ने रनवे 29R से उड़ान भरी।
रायपुर जा रहे विमान को एटीसी ने उड़ान के दौरान चार हजार फीट की ऊंचाई तक जाने को कहा, लेकिन विमान ने सीध में उड़ान न भरकर विमान का रुख दूसरे रनवे की ओर कर लिया। समस्या तब गंभीर हो गई जब दूसरे रनवे से हैदराबाद के लिए विमान ने उड़ान भरी।
टीसीएएस साबित हुआ मददगार
रिपोर्ट में कहा गया है कि परिणामस्वरूप दोनों विमानों के बीच ‘दूरी का उल्लंघन’ हुआ, जिससे दोनों विमानों में ट्रैफिक अलर्ट और टकराव से बचाने की प्रणाली (टीसीएएस) सक्रिय हो गई। इससे पायलटों को अलर्ट भेजा गया। बता दें, टीसीएएस विमान की सुरक्षा सुविधा होती है, जो पायलटों को आसपास के अन्य विमानों की उपस्थिति के बारे में बताकर हवा में टकराव रोकने में मदद करती है। 17 नवंबर को यह पूरी घटना एक मिनट से भी कम समय के भीतर घटी थी।
यह है नियम
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) वर्तमान में इस गंभीर घटना की जांच कर रहा है। बता दें, तय मानक के अनुसार उड़ान के दौरान दो विमानों के बीच वर्टिकल (लंबवत) दूरी कम से कम एक हजार फीट की होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में यह दूरी एक हजार से कम हो गई। एक बार तो यह दूरी 400 फीट तक पहुंच गई थी। यह गलती एटीसी के स्तर पर हुई या फिर पायलट के स्तर पर अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
1996 में चरखी दादरी दुर्घटना के बाद से सभी विमानों के लिए अनिवार्य टीसीएएस ने संभावित आपदा से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस घटना में भी टीसीएएस की अहम भूमिका सामने आई है।