एनजीओ गुरु के प्रमुख राजेश वर्मा का कहना है कि देश में एनजीओ की कोई कमी नहीं है। लेकिन देश के अधिकांश एनजीओ परंपरागत तरीके से काम कर रहे हैं। जिसके कारण एनजीओ की भूमिका को जितना महत्व मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा समेत तमाम क्षेत्र में एनजीओ की भूमिका पर बल दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को पांच अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प के साथ तमाम क्षेत्रों में काम कर रहे एनजीओ जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में एनजीओ गुरु ने दिल्ली में देश के करीब 600 एनजीओ को इकट्ठा किया और उन्हें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीति के क्षेत्र में काम करने के गुर सिखाए। एनजीओ गुरु के प्रमुख राजेश वर्मा का कहना है कि यह एनजीओ देश के ओद्योगिक विकास से लेकर तमाम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं लेकिन इसके लिए कार्य प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता है।
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इस समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश डा. बी रामास्वामी ने कहा कि देश के विकास में एनजीओ की भूमिका को कभी नकारा नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति के मुताबिक किसी योजना को जमीन तक चरितार्थ करने के लिए गैर सरकारी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वतंत्रता के बाद भारत के इतिहास में तमाम गैर सरकारी संगठनों की नि:स्वार्थ सेवा ने देश को काफी ताकत दी है। इसलिए देश में एनजीओ की नितांत आवश्यकता है।
एनजीओ गुरु के प्रमुख राजेश वर्मा का कहना है कि देश में एनजीओ की कोई कमी नहीं है। लेकिन देश के अधिकांश एनजीओ परंपरागत तरीके से काम कर रहे हैं। जिसके कारण एनजीओ की भूमिका को जितना महत्व मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा समेत तमाम क्षेत्र में एनजीओ की भूमिका पर बल दिया।
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वर्मा कहते हैं कि एनजीओ के लिए सबसे ज्यादा जरूरी मिलने वाले फंड का सदुपयोग है। उन्होंने कहा कि तमाम एनजीओ इसलिए अपने लक्ष्य से दूर रह जाते हैं क्योंकि उन्हें मिलने वाला फंड उनके उद्देश्य की पूर्ति की बजाय गैर सरकारी संगठन तक सीमित होकर रह जाता है। इसके कारण एनजीओ द्वारा प्रस्तावित काम और बदलाव जमीन पर दिखाई नहीं देता। राजेश वर्मा का कहना है कि उनकी संस्था देश के तमाम गैर सरकारी संगठनों का मार्ग दर्शन कर रही है ओर उन्हें देश विकास की धारा में प्रमुख भूमिका के लिए प्रेरित करती है।