केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को भी साधने की कोशिश की गई। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश से सात नए केंद्रीय मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। इसमें समाज के सभी प्रमुख वर्गों को साथ लेकर चलने का संकेत दिया गया। कौशल किशोर, बीएल वर्मा और एसपी सिंह बघेल को शामिल कर दलित समाज को बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई तो खीरी सांसद अजय मिश्रा को शामिल कर ब्राह्मणों की नाराजगी भी कम करने की कोशिश की गई। इसी प्रकार अनुप्रिया पटेल को शामिल कर ओबीसी समुदाय को भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई।
भाजपा के यूपी मिशन में सबसे बड़ी बाधा जाटों और किसानों की नाराजगी हो सकती है। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में किसी ऐसे नेता को शामिल नहीं किया गया है जिसकी पहचान एक किसान नेता के रूप में होती हो। विश्लेषकों के अनुसार भाजपा को इस रणनीतिक चूक का नुकसान हो सकता है। संजीव कुमार बाल्यान के रूप में जाटों की भागीदार अवश्य है, लेकिन अब तक वे जाटों-किसानों के बीच अपनी पैठ बनाने और उनका गुस्सा कम करने में नाकाम रहे हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने के कारण निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद की नाराजगी भी सामने आ गई है। पार्टी ने अपने लिए एक कैबिनेट मंत्री पद की मांग की थी, लेकिन उसे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। पूर्वांचल में गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी सहित कई जिलों में इसका असर पड़ सकता है।
पार्टी की उम्मीद- जीतेंगे
उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार का यह मंत्रिमंडल विस्तार देश के हित में है। इसके जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का मिशन 2022 जीतने में कामयाब रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल में समाज के हर वर्ग को शामिल कर यही संकेत दिया है कि भाजपा हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। हम केवल साथ लेकर चलने की बात ही नहीं करते, बल्कि सत्ता में भी उनकी भागीदारी को महत्त्वपूर्ण मानते हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि नए मंत्रियों की फौज नई ऊर्जा से लबरेज है और यह केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगी। इससे समाज के सबसे निचले तबकों तक केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं को पहुंचाने में और उनको मजबूत करने में मदद मिलेगी।