ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की एक टीम हर वर्ष 'साल का शब्द' चुनती है। बीते 5 वर्ष में उसने गॉब्लिन मोड, वैक्स, क्लाइमेट इमरजेंसी, टॉक्सिक जैसे शब्द चुने। वही शब्द जो हमारे जीवन में घट रही चीजों और विचारों की अभिव्यक्ति का बुनियादी माध्यम माने जाते हैं। इनका चुनाव कैसे होता है? क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है? ऑक्सफोर्ड भाषा विभाग के अध्यक्ष कैस्पर ग्राथवोल से जानिए इस प्रक्रिया के रोचक पहलू।
30-40 शब्दों में से चयन
आखिरी शब्द पूरे साल में जुटाए 30-40 शब्दों के समूह में से चुना जाता है। यह शब्द ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा संभावित सूची में सालभर जोड़े जाते हैं। चुनाव के समय समस्त स्टाफ यह शब्द कोशकारों को भेजते हैं।
जरूरी नहीं कि शब्दकोश में भी आए
यह जरूरी नहीं कि साल का शब्द ऑक्सफोर्ड शब्दकोश में भी जगह पा जाए। ऑक्सफोर्ड का प्रयास इस शब्द के जरिए संबंधित वर्ष के लोकाचार और भावना को पेश करना होता है।
कोशकार देखते हैं साक्ष्य क्या हैं
हर वर्ष प्रेस में कई कोशकार जमा होते हैं और उन साक्ष्यों का विश्लेषण करते हैं, जो किसी शब्दों को यह उपाधि देने के लिए पेश हुए हैं। कितनी दफा वह शब्द उपयोग हुआ? किस समय उपयोग बढ़ा? दुनिया उस शब्द से क्या कर रही है? उपयोग क्यों बढ़ रहा है? इस सब पर बात होती है। इनकी भाषा का विश्लेषण कर सूची को छोटा करते हैं। कई मानकों व कसौटियों से गुजर सूची छोटी होती जाती है, अंतत: 1 शब्द बचता है।
2022 में नई परिपाटी
ऑक्सफोर्ड ने 2022 से शब्द के चुनाव के लिए दुनिया भर के लोगों से मतदान का चरण भी जोड़ा है। इसके तहत अंतिम 3 शब्द विकल्प के तौर पर पेश होते हैं। 2022 में गॉब्लिन मोड को 3.18 लाख लोगों ने वोट देकर चुना था। इस साल के लिए सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और 3 शब्द मतदान के लिए जल्द जारी होंगे।
चुने गए शब्द और उनके मायने
2022 में गॉब्लिन-मोड
यह स्लैंग बोलचाल का शब्द 2009 में पहली बार नजर में आया। अर्थ है खुद में आसक्त, आलसी, बेढंगा व लालची आचरण जो सामाजिक मान्यताओं को नकार दे। फरवरी 2022 में यह अखबार व पत्रिकाओं से लेकर सोशल मीडिया अचानक वायरल हुआ।
-2021 में वैक्स : कोविड टीके की वजह से यह चलन में आया और साल का शब्द बना।
-2020 कोई नहीं : इस साल कोई एक शब्द नहीं चुना गया। कहा, कोई एक शब्द इस साल का पूर्णत: प्रतिनिधित्व नहीं करता।
-2019 में टॉक्सिक व 2018 में क्लाइमेट इमरजेंसी : इन्हें संबंधित वर्षों का उचित प्रतिनिधि माना गया।