पिछले दिनों मुस्लिम नेताओं द्वारा कथित तौर पर दिए गए 'नफरत फैलाने वाले बयान' के खिलाफ हिंदुओं के लिए समान सुरक्षा की मांग करते हुए एक हिंदू संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हिंदू संगठन ने उस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने धर्म संसद में हिंदू धार्मिक नेताओं द्वारा कथित तौर पर दिए गए 'नफरत फैलाने वाले बयान' के खिलाफ उत्तराखंड, केंद्र और दिल्ली पुलिस से हरिद्वार और दिल्ली से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' नामक संगठन ने मुस्लिम नेताओं और मौलवियों के कथित तौर पर दिए गए 'नफरत फैलाने वाले बयान' की एक सूची दी है। याचिका में कहा गया है किबइनमें से कुछ ने हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार और जिहाद की भी बात की है लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर इस आवेदन में कहा गया है, 'भारत का प्रत्येक नागरिक समान रूप से कानूनों के समान संरक्षण का हकदार है और इसलिए नफरत फैलाने वाले बयानों की घटनाओं का विश्लेषण करते समय बहुमत या अल्पसंख्यक की अवधारणा को पेश नहीं किया जाना चाहिए।'
'नफरत फैलाने वाले बयान' की न्यायिक समीक्षा की मांग करते हुए संगठन और उसके दो सदस्यों द्वारा आवेदन में कहा गया है कि नफरत फैलाने वाले बयान व्यक्तियों द्वारा समाज में अशांति पैदा करने, हिंसा और सांप्रदायिक तनाव को भड़काने के इरादे से दी जाती है। आत्मरक्षा के विषय के साथ एक विशेष समुदाय के सदस्यों की रक्षा करने के इरादे से दिए गए भाषण 'नफरत फैलाने वाले बयान' के दायरे में नहीं आ सकते हैं।' आवेदकों ने शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप की मांग की है।
गत 12 जनवरी को चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश और पत्रकार कुर्बान अली द्वारा हरिद्वार में दिसंबर में आयोजित धर्म संसद के प्रतिभागियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किया था।
वहीं, गैर सरकारी संगठन 'हिंदू सेना' की ओर से भी एक याचिका लगाई गई है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने वकील वरुण कुमार सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कराया। इसमें हिंदू समुदाय और उनके देवी-देवताओं के खिलाफ भी कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देने के लिए एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने की अपील की गई है। साथ ही तौकीर रजा, साजिद राशिदी, अमानतुल्ला खां, वारिस पठान समेत अन्य के खिलाफ भी ऐसे भाषणों के लिए कार्रवाई किए जाने की अपील की गई है।