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Hijab Row: हिजाब विवाद में मलाला की एंट्री, भारतीय नेताओं से की ये अपील

Wed, 09 Feb 2022 08:09 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नोबल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने कर्नाटक हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा मुस्लिम लड़कियों को पढ़ाई व हिजाब के बीच किसी एक के चयन के लिए मजबूर किया जा रहा है।
 
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मलाला यूसुफजई (फाइल फोटो)
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विस्तार
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कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद पर अब दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भड़की हिंसा के बाद नोबल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि, हिजाब में लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना भयावह है। 

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मलाला ने ट्वीट किया-

कॉलेज में हमें पढ़ाई और हिजाब के बीच किसी एक का चयन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हिजाब में लड़कियों को स्कूल जाने से मना करना भयावह है। कम या ज्यादा पहनने के लिए महिलाओं के प्रति एक नजरिया बना रहा है। भारतीय नेताओं को चाहिए कि वे मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकें।

 

राज्य में स्कूल-कॉलेज तीन दिन तक बंद 
हाईकोर्ट में मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान विभिन्न स्थानों पर हुए विवाद को देखते हुए कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने राज्य के सभी हाई स्कूल और कॉलेजों को 3 दिनों के लिए बंद करने के आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन से शांति बनाए रखने की अपील की।

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बढ़ रहा है विवाद
एक ओर हाईकोर्ट में हिजाब के मुद्दे पर सुनवाई चल रही थी तो वहीं दूसरी ओर राज्य के पीईएस कॉलेज में विवाद बढ़ता नजर आया। यहां एक छात्रा के हिजाब पहन कर आने के विरोध में छात्र भगवा गमछा पहन कर जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। इसके जवाब में छात्रा ने भी अल्लाह हु अकबर के नारे लगाए। वहीं, उडुपी के कॉलेज में भी हिजाब पहनकर आई छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके जवाब में भगवा गमछा पहनकर आए छात्र उनके सामने आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को संभाला।  

क्या है विवाद
कर्नाटक में हिजाब पर विवाद की शुरुआत जनवरी महीने में उडुपी शहर से हुई थी। शहर के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया था। कॉलेज प्रशासन ने इसका कारण ड्रेस में समानता को रखना बताया है। इसके बाद यह विवाद राज्य के कई जिलों में बढ़ता ही चला गया। कई संस्थानों में छात्राओं ने हिजाब पहनकर आना शुरू किया तो इसके विरोध में छात्र भगवा गमछा पहनकर आने लगे। 

जो संविधान कहेगा, हम वही करेंगे
मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने कहा कि अदालत कारणों और कानून के हिसाब से कार्य करेगी न कि किसी जुनून या भावनाओं के हिसाब से। कोर्ट ने आगे कहा कि जो संविधान कहेगा हम वही करेंगे,संविधान ही हमाारे लिए भगवद्गीता है। कोर्ट ने कहा कि एक फैसला ही सभी याचिकाओं पर लागू होगा। 

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