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West Bengal: ट्राम से पूजा परिक्रमा के दिन लदे, विदाई की ओर बढ़ रहा कोलकाता का 'गर्व'

Wed, 25 Sep 2024 01:44 PM IST
श्वेता महतो एन. अर्जुन, कोलकाता

सार

परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने कहा ट्राम के परिचालन से कोलकाता शहर में जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि समय के साथ वाहन की संख्या बढ़ी है, इसी तरह आज लोग मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर के अधिकांश रूटों पर ट्राम पहले से ही बंद हैं।
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ट्राम - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अगर आप भी हेरिटेज ट्राम में बैठकर कोलकाता की विश्व प्रसिद्ध दुर्गापूजा का लुत्फ उठाने की सोच रहे हैं, तो अब वह मौका नहीं मिलेगा। क्योंकि परिवहन विभाग ने पूजा परिक्रमा के लिए इस बार जो व्यवस्था की है, उसमें ट्राम को शामिल नहीं किया है। जबकि पिछले वर्ष ट्राम परिक्रमा में शामिल थी। यह जानकारी खुद परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने दी। उन्होंने कहा, इस बार पूजा परिक्रमा में ट्राम को शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इसका मुख्य कारण इसकी धीमी गति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, इससे जाम की समस्या उत्पन्न होती है। दूसरी ओर, जाम की समस्या से निपटने के लिए शहर में केवल एक रूट पर धर्मतला से खिदिरपुर तक ट्राम चलेगी। लोग सरकार के इस फैसले को कोलकाता के 151 वर्ष के हेरिटेज 'गर्व' की विदाई की दिशा में एक और कदम मान रहे हैं। जबकि ट्राम प्रेमियों ने कहा, यह अवैज्ञानिक बात है। हम राज्य व केंद्र सरकार से बात करेंगे। हम कोर्ट जाएंगे।
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जाम को देखते हुए ट्राम को बंद करने का फैसला
परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने कहा ट्राम के परिचालन से कोलकाता शहर में जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि समय के साथ वाहन की संख्या बढ़ी है, इसी तरह आज लोग मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर के अधिकांश रूटों पर ट्राम पहले से ही बंद हैं। दो रूटों पर चलने के बावजूद यह अनियमित है। पूजा के दौरान ट्रैफिक जाम की आशंका को देखते हुए इस वर्ष पूजा के दौरान ट्राम बंद रखने का निर्णय लिया गया है। पिछले वर्ष पूजा के दौरान आम लोगों ने षष्ठी, अष्ठमी, नवमी और दशमी को एस्प्लेनेड-श्यामबाजार और एस्प्लेनेड-गरियाहाट रूट पर एसी ट्राम से यात्रा की थी। हालांकि इस बार ऐसा नहीं होगा।ट्राम से जाम नहीं लगताः महादेव कोलकाता ट्राम यूजर्स एसोसिएशन के महासचिव महादेव शी कहते हैं, वे मंत्री हैं। वह कह सकते हैं। लेकिन उनकी बात बिल्कुल अवैज्ञानिक है। ट्राम से कोई जाम नहीं लगता। कोई दिक्कत नहीं होती। शहर में दस लाख वाहन चलते हैं और ट्राम चल रहे हैं दस। तो बताइए, जाम वाहनों से लग रहा है या ट्राम से। ट्राम तो अपनी पटरी पर चलते हैं। हम वैज्ञानिक तरीके से सिद्ध कर सकते हैं कि ट्राम से जाम नहीं लगता। पूरी दुनिया में इसके फायदों को देखते हुए ट्राम को परिवहन में शामिल कर रही है। उन्होंने कहा, हम राज्य और केंद्र सरकार से बात करेंगे। अगर कुछ नहीं हुआ तो कोर्ट जाएंगे।

ट्राम और कोलकाता का रिश्ता, एक नजर में
कोलकाता में पहली बार ट्राम 24 फरवरी, 1873 में सियालदह और आर्मेनिया घाट स्ट्रीट के बीच चला था। इसे बनाने में करीब 1.5 लाख रुपए लगे थे। लेकिन किन्हीं कारणों से वह बंद हो गई। फिर से 1881 में शुरू किया गया। 27 मार्च 1902 में पहली बार इलेक्ट्रिक ट्राम सड़कों पर दौड़ी। तब यह महानगर के जीवन का हिस्सा थी। 1930 तक कोलकाता में 300 से अधिक ट्राम थीं। 1980 तक ट्राम में रोज 7.5 लाख लोग यात्रा करते थे, जो 2008 तक घट कर संख्या 77,500 रह गई। इसके बाद लगातार यात्रियों की संख्या घटती चली गई और कई रूट बंद कर दिए गए। मई, 2020 से अब केवल दो रूटों पर ट्राम चल रही हैं।
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