'गर्म जलवायु में मानसून का प्रबंधन' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दशक में तटीय क्षेत्रों के 74 प्रतिशत जिले, मैदानी इलाकों के 71 प्रतिशत और पहाड़ी इलाकों के 65 प्रतिशत जिलों में अत्यधिक गर्मी का असर उच्च से बहुत अधिक तक दर्ज किया गया।
वहीं, इस दौरान मैदानी और पहाड़ी जिलों में लू के दिनों में 36 प्रतिशत की बढोतरी भी देखी गई वहीं, तटीय जिलों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत था। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और त्रिपुरा इस दशक में शीर्ष पांच हीटवेव हॉटस्पॉट राज्य थे। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ज्यादा भीषण गर्मी इस दशक में 2015 में हुई, जो 1998 की घटना के बाद दूसरी सबसे घातक घटना थी।
वहीं, इस दशक में पिछले दो दशकों की तुलना में कम संचयी हीटवेव वाले दिन दर्ज किए गए।
इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मार्च-अप्रैल-मई की अवधि और उसके बाद जून-जुलाई-अगस्त-सितंबर की अवधि के दौरान मैदानी इलाकों के जिलों में सबसे अधिक गर्मी वाले दिन देखे गए। वहीं, पिछले दशक में तटीय जिलों में आवृत्ति और तीव्रता दोनों में हीटवेव की संख्या में गिरावट देखी गई। ऐसा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवाती गतिविधियों में हुई बढोतरी के कारण संभव हुआ।
आईएमडी ने दिया ये आंकड़ा
वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस गर्मी में, भारत में 536 दिनों तक लू चली। यह आंकड़ा बीते14 साल में सबसे अधिक है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 1901 के बाद से इस साल जून का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया।