सुनवाई के दौरान सुकन्या के वकील ने जमानत की मांग भी की। उन्होंने अदालत में कहा कि वह एक महिला है और 110 दिनों से अधिक समय से हिरासत में है। उनके वकील ने कहा कि वह अनुसूचित अपराध में आरोपी नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में पशु तस्करी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले गिरफ्तार सुकन्या मंडल की जमानत याचिका के जवाब में लिखित दलीलें पेश करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को समय दिया है।
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सुकन्या तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रता मंडल की बेटी है। अनुब्रता भी इसी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायधीश दिनेश कुमार शर्मा ने पांच जुलाई को जमानत याचिका पर ईडी को नोटिश जारी किया था। उन्होंने इस मामले में रिपोर्ट भी दाखिल करने के आदेश दिए थे और अब उन्होंने लिखित में दलीलें दाखिल करने के लिए एक और सफ्ताह का समय दे दिया है।
सुनवाई के दौरान सुकन्या के वकील ने जमानत की मांग भी की। उन्होंने अदालत में कहा कि वह एक महिला है और 110 दिनों से अधिक समय से हिरासत में है। उनके वकील ने कहा कि वह अनुसूचित अपराध में आरोपी नहीं है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस मामले को 11 सितंबर तक स्थगित किया है। एक अन्य याचिका में सुकन्या ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।
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उनके वकील ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने पहले जमानत से इनकार कर दिया था। वकील ने कहा, इस मामले के लिए याचिकाकर्ता को अब हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और उसके लिए श्कायत भी दर्ज कर दी है।
उन्होंने सुकन्या के लिए समानता की मांग की है। इस मामले में सह अभियुक्त तानिया सांयाल को पहले ही ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। याचिका में बताया गया कि सांयाल बीएसएफ कमांडेंट सतीश कुमार की पत्नी है जो इस मामले में मुख्य आरोपी है। वकील ने बताया कि सांयाल पर रिश्वत लेने का आरोप है। उन्होंने इस मामले के दूसरे आरोपी इनामुल हक जिसपर भेड़ों के तस्करी का आरोप है, से रिश्वत ली थी।
इस मामले में सीबीआई ने पिछले साल 11 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुब्रता मंडल को गिरफ्तार किया था। ईडी ने उन्हें पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था।