प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद विपक्षी दल के नेता
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क्या विपक्ष जनता की आवाज सुनने-समझने में नाकाम रहा है? क्या वह आर्थिक मंदी के कारण केंद्र के खिलाफ पैदा उसके गुस्से को सही राजनीतिक दिशा देने में असमर्थ रहा है? अगर शरद यादव की मानें तो यह बात बिल्कुल सही है। शरद यादव के मुताबिक केंद्र सरकार का विरोध करने में जनता आगे निकल गई और विपक्ष पीछे रह गया।
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में जनता ने यह दिखा दिया कि वह एक विकल्प की तलाश कर रही है। लेकिन विपक्ष उसकी इस सोच को सही परिणाम में तब्दील नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष पूरे आत्मविश्वास के साथ लड़ाई लड़ता तो इन चुनावों का परिणाम कुछ और होता।
सोमवार को दिल्ली में 13 विपक्षी दलों ने एक बैठक कर केंद्र के आर्थिक फैसलों का सम्मिलित विरोध करने का निर्णय लिया। इस बैठक में कांग्रेस, आरजेडी, आरएलएसपी सहित कई अन्य दल शामिल हुए। बैठक के बाद बोलते हुए जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता शरद यादव ने कहा कि आर्थिक मंदी के कारण लोगों की नौकरियां खतरे में हैं, कृषि तबाही के कगार पर है और उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं।
यही कारण है कि लोग केंद्र से बेहद नाराज हैं और वे उसका विकल्प खोज रहे हैं। अब राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उसके गुस्से को सही दिशा दें। उन्होंने सभी दलों से साथ आकर केंद्र सरकार का विरोध करने की अपील भी की।
विपक्ष क्यों असफल रहा
जनता के इस गुस्से को समझने में कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी भी असफल क्यों रही? आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने अमर उजाला से कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि मीडिया में अंधाधुंध प्रचार करके चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी प्रचार करने में माहिर है। केवल प्रचार के बल पर उन्होंने यह माहौल बनाने की कोशिश की कि जैसे बीजेपी के खिलाफ यहां कोई लड़ाई ही नहीं है और वह अपनी रणनीति में कामयाब भी रही। इससे विपक्ष का आत्मविश्वास डिग गया जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा।
पूरा विपक्ष नहीं दिखा साथ
आर्थिक विशेषज्ञों की राय है कि देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। औद्योगिक उत्पादन, कृषि उत्पादन और रोजगार बेहद खराब स्थिति में हैं और लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे माहौल में विपक्ष ने एक होकर सरकार का विरोध करने का फैसला किया है। लेकिन इस विरोध में भी विपक्ष की आपसी फूट साफ दिखाई पड़ रही है।
सोमवार की विपक्षी दलों की बैठक में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य प्रमुख दल दिखाई नहीं पड़े। बैठक में शामिल हुए नेता भी यह बताने की स्थिति में नहीं दिखे कि ये प्रमुख दल उसकी लड़ाई में उनके साथ क्यों नहीं हैं।
सपा-बसपा ही नहीं, महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना तलाश रहे शरद यादव भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए जबकि वे दिल्ली में ही मौजूद थे। ऐसी स्थिति में विपक्षी दल संसद सत्र के दौरान सरकार के सामने कितनी मुश्किलें खड़ी कर पाएंगे, यह साफ नहीं है।