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Haryana: सजने लगा हरियाणा का सियासी रण; कोई तैयार कर रहा मेनिफेस्टो, कहीं सज रही जातिगत समीकरणों की फील्डिंग

आशीष तिवारी
Updated Tue, 16 Jul 2024 08:23 PM IST

सार

भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि ऐसी कोई भी कमजोर कड़ी हरियाणा में नहीं रखना चाहते हैं, जिससे उसका आने वाले विधानसभा के चुनाव में असर पड़े।
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Haryana Polls - फोटो : Amar Ujala


भाजपा ने लोकसभा चुनावी साल के आसपास हरियाणा के मुख्यमंत्री को बदलकर बड़ा सियासी संदेश दिया था। हालांकि यह बात अलग है कि उसके नतीजे लोकसभा चुनाव में बिल्कुल नहीं दिखे। यही वजह है कि भाजपा के रणनीतिकार हरियाणा के नतीजे को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि ऐसी कोई भी कमजोर कड़ी हरियाणा में नहीं रखना चाहते हैं, जिससे उसका आने वाले विधानसभा के चुनाव में असर पड़े। उनका कहना है कि संगठन ने किसी को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ पार्टी के बड़े नेताओं की रैलियां और जनसभाओं की तैयारी शुरू की है। बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश के गृहमंत्री अमित शाह के दौरे भी शुरू हो गए हैं। वह बताते हैं कि बीते कुछ समय में अमित शाह के दो दौरे हरियाणा की सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होंगे।


राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार सुनील शर्मा कहते हैं कि रैली और जनसभाओं से अलग हटकर भाजपा ने जो सियासी जातिगत समीकरण साधे हैं, वह महत्वपूर्ण है। शर्मा कहते हैं कि अभी तक की रणनीति के मुताबिक आने वाले चुनावों में गैर जाटों के वोट के सहारे भाजपा तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रही है। जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में अपने नेताओं को जिम्मेदारियां दी हैं, वह इस बात की तस्दीक करते हैं कि जातिगत समीकरणों के आधार पर वह पूरे चुनाव में उतरने वाले हैं। भाजपा ने जिस तरह से ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, उससे आने वाले चुनाव में की जाने वाली फल्डिंग के इशारे भी स्पष्ट हैं। जबकि हरियाणा के प्रभारी जाट समुदाय से आते हैं। वहीं, हरियाणा के सह प्रभारी गुर्जर समुदाय से हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह जातिगत कांबिनेशन आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी मजबूती से आगे भी आजमाने वाली है। 


जातिगत सियासी समीकरणों की नींव पर भाजपा ने हरियाणा में पहले से ही अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी थी। इस कड़ी में पंजाबी बिरादरी से आने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की जगह पर ओबीसी समुदाय से आने वाले नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया था। राजनीतिक जानकार देवेंद्र पूनिया कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने सियासी नजरिए से यह फैसला तो जरूर लिया था, लेकिन इसका फायदा लोकसभा चुनाव में बिल्कुल नहीं हुआ। यही वजह है कि पार्टी आने वाले विधानसभा के चुनाव में जातिगत समीकरणों की पूरी फील्डिंग के बाद भी राजनीतिक कदमों को फूंक-फूंक कर रख रही है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी ने अपने बड़े नेताओं के हरियाणा में कार्यक्रमों और राजनीतिक रैलियों के माध्यम से सियासी जमीन पर उतरना शुरू कर दिया है।


सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने भी हरियाणा के सियासी समर में अपने दांव आजमाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने एक और जहां "हरियाणा मांगे हिसाब" अभियान को लांच किया है, वहीं जनता का मेनिफेस्टो भी बनाया जाना शुरू हो गया है। कांग्रेस के नेता दीपेंद्र हुड्डा कहते हैं कि हरियाणा की जनता ने लोकसभा के चुनाव में आने वाले विधानसभा के नतीजे की झलक दिखा दी है। पार्टी आने वाले विधानसभा के चुनाव में हर घर तक पहुंचने वाली है। इसके लिए सभी तैयारियां की जा चुकी है। कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक हरियाणा में इस बार का चुनाव जनता के मेनिफेस्टो के आधार पर लड़े जाने की पूरी तैयारी है। इसके लिए बाकायदा पार्टी ने हरियाणा के प्रत्येक जिले शहर कस्बे और गांव में सुझाव वाहन भेजने का पूरा रोड मैप तैयार किया है। हरियाणा कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि इन वाहनों में एक सुझाव पेटी रखी होगी। जिसमें जनता के सुझाव लिए जाएंगे और उसके बाद हरियाणा का मेनिफेस्टो भी तैयार होगा। 


कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा इनेलो और बसपा का हुआ सियासी गठबंधन भी हरियाणा की राजनीति में बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी में है। बसपा ने इनेलो के साथ गठबंधन कर जाट और दलित वोटों की जतिगत समीकरणों की, जो बिसात बिछाई है उस पर दोनों पार्टियों को बहुत उम्मीद है। बहुजन समाज पार्टी के नेताओं का मानना है कि हरियाणा के विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाला है। दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर 90 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव में सीटों का बंटवारा भी कर लिया है। बहुजन समाज पार्टी के मुताबिक जिन 37 सीटों पर उनकी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं वह सभी सियासी नजरिए से उनकी पार्टी के लिए हादसे बेहद महत्वपूर्ण हैं। जबकि 53 सीटों पर इनेलो की दावेदारी तय कर दी गई है। सियासी जानकारो का कहना है कि इसके अलावा कई और छोटे-छोटे राजनीतिक दल भी हरियाणा के सियासी समर में अपने-अपने लिहाज से दावेदारी कर चुनावी माहौल बना रहे हैं।  

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