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Haryana: यूं ही नहीं हुई है हरियाणा में बड़ी 'सियासी सर्जरी', गुजरात की तर्ज पर सजाई गई राजनीतिक चौसर!

आशीष तिवारी
Updated Tue, 12 Mar 2024 02:11 PM IST

सार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सियासी उठापटक में भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों ने दूर की सियासत को नजर में रखते हुए बड़े फैसले लेने की योजना बनाई है। इसके चलते सबसे पहले कैबिनेट का इस्तीफा देकर दोबारा मंत्रिमंडल की शपथ लेने की तैयारी की गई है...
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Haryana - फोटो : Amar Ujala/ Sonu Kumar


सियासी जानकार बताते हैं कि दुष्यंत चौटालाा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पहले अपने विधायकों को बचाएं और उससे निकलने वाले संदेश को न सिर्फ लोकसभा, बल्कि उसके कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में भी जाने से रोकें। राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण शर्मा कहते हैं कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जजपा की पूरी सियासी गणित को भारतीय जनता पार्टी ने फिलहाल बिगाड़ दिया है। शर्मा मानते हैं कि जजपा को अलग कर भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी अपनी सभी चालें दुरुस्त की हैं। कहा यही जा रहा है कि हरियाणा की सियासत में जाटों के बड़े वोट बैंक की आपस में ही सेंधमारी होगी, जिसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को गैर जाट बिरादरी के वोट बैंक के तौर पर मिलना तय माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरीके से जजपा को अलग किया है, उससे पार्टी को फायदा होता हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीते कुछ समय में जिस तरह से जजपा के विधायक क्षेत्र से लेकर विधानसभा तक में अपनी पार्टी के विरोध में माहौल बना रहे थे, उसी का फायदा भारतीय जनता पार्टी को इस बड़ी सियासी सर्जरी को करने में मिला है। राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण शर्मा के साथ मुताबिक इस वक्त जो सियासी चर्चा है, वह यही है कि जजपा के कई विधायक अपनी पार्टी के साथ नहीं हैं। ऐसे में जब लोकसभा के चुनाव सिर पर हैं, तो किसी भी पार्टी के लिए विधायकों का टूटना या उनका विरोध में आना सियासी दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाता है।

गठबंधन टूटने पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कैबिनेट के इस्तीफा देने का पूरा नाटक तैयार किया गया है। वह कहते हैं कि उन्होंने तीन महीने पहले ही बता दिया था कि भाजपा-जजपा में समझौता तोड़ने की अघोषित सहमति बन गई है। इस बार भाजपा के इशारे पर जजपा और इनेलो कांग्रेस की वोट में सेंध मारने के लिए फिर से जनता के बीच जाएंगे।

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