हरियाणा में राजनेताओं ने भी खेलों को बढ़ावा देने में मदद की है। हरियाणा की बहू कर्णम मल्लेश्वरी को मेडल जीतने पर तत्कालीन चौटाला सरकार ने 25 लाख रुपये दिए थे। उसके बाद मुख्यमंत्री चौटाला ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए कुछ ऐसे विभाग, जो लाभ में चल रहे थे, जैसे मार्केटिंग बोर्ड को कुश्ती और एथलेटिक्स दे दिया गया। हैफेड को बैडमिन्टन, हुडा को महिला हॉकी और एचएसआईआईडीसी को वालीबॉल की जिम्मेदारी दी गई। मकसद था कि इन खेलों में कम से कम 200 अच्छे खिलाड़ी तैयार करने हैं। हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन ने राज्य खेल आयोजित किए थे। हालांकि वह आयोजन एक ही बार हो सका। सरकार बदल गई तो बहुत से कायदे भी बदल गए।
चौटाला सरकार ने ही सबसे पहले ओलंपिक में मेडल लाने वाले को एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। इससे धीरे धीरे एशियन और दूसरी प्रतिस्पर्धाओं में मेडल आने लगे। इसके बाद 2004 में हुड्डा सरकार आई। उसमें कोचों को भी 10 से 20 लाख रुपये दिए गए। खिलाड़ियों को डीएसपी भर्ती किया गया।
अब मुख्यमंत्री खट्टर ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने वाले को 6 करोड़ रुपये देने की घोषणा कर दी है। अच्छी बात ये है कि उन्होंने नेशनल अवार्डी खिलाड़ियों या कोचों को 5000 से 20000 रुपये का मानदेय प्रतिमाह देना शुरू कर दिया। भीम अवॉर्डी को पहले कोई मानदेय नहीं मिलता था, अब उसे भी पांच हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। नेशनल अवॉर्डी को 20 हजार रुपये दिए जाते हैं। जैसे ही ओलंपिक में मेडल आता है तो इनामों की बौछार होने लगती है। बतौर ओमप्रकाश, खेलों को लेकर भले ही 'राजनीतिक दंगल' की बात कही जाती है, लेकिन इससे खिलाड़ी और खेल का ज्यादा नुकसान नहीं है। राजनेता जमकर घोषणाएं करते हैं तो खिलाड़ियों का भला ही होता है, वोट का चक्कर अपनी जगह रहता है। कई कोच भी जुनूनी रहे हैं। जैसे सेना से रिटायर्ड हवा सिंह, जो कि द्रोणाचार्य और अर्जुन अवॉर्डी हैं, ने भिवानी के साई सेंटर को ही बॉक्सिंग का केंद्र बना दिया। खेलों के विकास में मेहताब सिंह का नाम भी सम्मान से लिया जाता है।
127 सदस्यीय भारतीय दल में 31 हरियाणा के
टोक्यो ओलंपिक में गए भारत के 127 खिलाड़ियों के दल में से हरियाणा के 31 हैं। पंजाब से 19 खिलाड़ी गए थे। महिलाओं की हॉकी टीम में 9 खिलाड़ी हरियाणा की हैं। कुश्ती के सात, शूटिंग 4 और बॉक्सिंग में चार खिलाड़ी टोक्यो गए थे। देश का एकमात्र गोल्ड मेडल हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने जीता है। भारत की जनसंख्या में हरियाणा और पंजाब का हिस्सा 4.4 प्रतिशत है, जबकि ओलंपिक में 40 प्रतिशत खिलाड़ी इन्हीं दोनों प्रदेशों से पहुंचते हैं। यूपी की जनसंख्या 17 प्रतिशत है, लेकिन वहां से 8 खिलाड़ी टोक्यो गए हैं।
हरियाणा का खेल बजट यूपी से 37 प्रतिशत ज्यादा है। यूपी की जीडीपी 20 लाख करोड़ रुपये है तो हरियाणा की 9 लाख करोड़ रुपये है। राजस्थान का खेल बजट 100 करोड़ है तो हरियाणा का 400 करोड़ रुपये है। हरियाणा में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ और खेल की तैयारी के लिए 15 लाख रुपये मिलते हैं। हरियाणा में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी के कोच को भी 20 लाख रुपये देते हैं। हरियाणा में साईं के 22 ट्रेनिंग सेंटर हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पहली बार सरकार ने चौथे स्थान पर रहने वाले प्रत्येक एथलीट और दूसरे खिलाड़ियों को भी 50-50 लाख रुपये दिए जाएंगे।
2008 में विजेंद्र सिंह ने जीता था पदक
2008 के ओलंपिक में भारत ने तीन पदक जीते थे। इनमें से एक पदक हरियाणा के विजेंद्र सिंह ने जीता था। 2012 के ओलंपिक में छह पदकों में से तीन पदक हरियाणा के खिलाड़ियों ने अपने नाम किए थे। 2016 में दो पदकों में से एक पदक हरियाणा की साक्षी मलिक ने जीता था। ध्यानचंद अवॉर्ड एवं भीम अवॉर्ड से सम्मानित पूर्व अंतरराष्ट्रीय वालीबॉल खिलाड़ी ओमप्रकाश सिंह ने कहा, हरियाणा में नेचुरल टेलेंट है, बस उसे एक आकार देना पड़ता है। गांव देहात में टेलेंट भरा पड़ा है।
कुछ लोगों का ये कहना कि आजकल खेलों को लेकर लोगों में कुछ बदलाव आ रहा है। जैसे पहले 'खेलों में हीरो' सभी का होता था। जाति बिरादरी का कोई चक्कर नहीं रहता था। अब कथित तौर पर कुछ लोग खिलाड़ी को 'जाति का हीरो' इस नजर से देखने लगे हैं। ओमप्रकाश सिंह कहते हैं, ये सभी बच्चे हरियाणा के हैं। वे किसी जाति विशेष के नहीं हैं। वे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुछ नेताओं की राजनीति के चक्कर में भाईचारा खराब न करें। कई बार खिलाड़ियों को नौकरी देने में भी भाई भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं। खिलाड़ी को नौकरी देने में 'पिक एंड चूज' या च्वाइस की गुंजाइश न छोड़ें। ऐसा नहीं होना चाहिए। खिलाड़ी को ईमानदारी से प्रोत्साहन दें। हरियाणा में खिलाड़ियों का प्रकृति और संस्कृति के साथ एक अटूट रिश्ता है। मिट्टी में खेलने वाले हरियाणा के लाल आगे भी यूं ही देश का नाम ओलंपिक में रोशन करते रहेंगे।