पश्चिमी क्षेत्र की बात करें तो गुजरात और महाराष्ट्र में 27 जलाशय हैं जिनकी 31.26 बीसीएम की स्टोरेज क्षमता है। इनमें अभी 34% पानी है जो पिछले 10 वर्षों का औसत 39% है। मध्य क्षेत्र में यूपी, उत्तराखंड, एमपी-छत्तीसगढ़ के 12 डैम आते हैं जिनकी क्षमता 42.30 बीसीएम है। ये सभी डैम भी 40% भर चुके हैं और पिछले दस सालों का औसत 42% है।
दक्षिण भारत की ओर देखें तो यहां सबसे ज्यादा पानी भर चुका है, यहां आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के डैम 62% तक भर गए हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल क्षमता वाले 31 जलाशय हैं और इनमें 31.99 बीसीएम पानी है। पिछले साल यहां 28% पानी ही था यानि अब 10 साल का औसत 41% है।
उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र के डैम में पानी कम है दूसरी तरफ पूर्वी क्षेत्र, दक्षिणी क्षेत्र में डिस्ट्रीब्यूशन बेहतर है। दक्षिण के डैम 62% तक भरे हुए हैं, जबकि उत्तरी क्षेत्र के डैम में 33% पानी भर चुका है। इन 91 जलाशयों की कुल स्टोरेज क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो देश की कुल स्टोरेज क्षमता 257.812 बीसीएम का 63% है।
ये काफी राहत की बात है कि मानसून के रहते ही ज्यादातर जलाशय पानी से भर गए हैं जिससे किसानो को सिंचाई के लिए और घरों में इस्तेमाल के लिए पानी देने में सरकार को दिक्कत नहीं होगी। लेकिन फिर भी देश में वॉटर हॉरवेस्टिंग की काफी जरूरत है जिससे मानसून पर निर्भरता कम हो सके।