देश में 20 से ज्यादा सेंटर एक साल में खुले
देश की राजधानी दिल्ली में 2016 में मां के दूध का पहला बैंक खोला गया। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के फोर्टिस फेम हॉस्पिटल ने स्वयं सेवी संस्था ब्रेस्ट मिल्क फाउंडेशन के साथ मिलकर एक नई कोशिश की है। इस ह्यूमन मिल्क बैंक का नाम अमारा रखा गया है। यहां महज दो महीनों में ही करीब 80 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क इकट्ठा किया गया।
इससे पहले राजस्थान के उदयपुर जिले के आरएनटी मेडिकल कॉलेज के शासकीय पन्ना धाय महिला चिकित्सालय के एक हिस्से में योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल की स्वयंसेवी संस्था ने 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' की स्थापना की। इसी तरह दिव्य मदर मिल्क बैंक की तर्ज पर ही राज्य की राजधानी जयपुर के जेके लोन अस्पताल में चल रहे महिला चिकित्सालय में राज्य सरकार और नॉर्वे सरकार की भागीदारी से 'जीवनधारा' नाम का मदर मिल्क बैंक खोला गया है जो राज्य का पहला सरकारी और उत्तर भारत का दूसरा मदर मिल्क बैंक है।
संरक्षण की प्रक्रिया बेहद जटिल
मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल में 1989 में स्थापित किए गए एशिया के सबसे पहले ह्यूमन मिल्क बैंक 'स्नेहा' को अब 'सायन मिल्क बैंक' के नाम से जाना जाता है। यहां की वर्तमान निदेशक डॉ. जयश्री मोंडकर बताती हैं कि मां का दूध तो शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है ही लेकिन कई बार उच्च रक्तचाप, अधिक रक्तस्राव या तेज बुखार के चलते मां शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं। उस स्थिति में किसी दूसरी मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प होता है, लेकिन यह सीधा शिशु को नहीं दिया जा सकता है। उससे पहले कुछ सेफ्टी टेस्ट करने पड़ते हैं और सावधानियां भी बरतनी होती हैं।
डोनर मदर का स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसी मांओं से इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकाला जाता है, जिसे बैंक में 62.5 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद चैकिंग होती है कि दूध बच्चे के लिए फायेदेमंद है या नहीं?
भारत में स्थिति
यूनिसेफ ने एक अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार भारत में 2000 में जहां शिशुओं को मां का दूध न मिल पाने का औसत 16 फीसदी था, वहीं साल 2015 में ये आंकड़ा बढ़कर 45 फीसदी तक हो गया है। जबकि अगर जन्म से छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराया जाए तो शिशुओं के मृत्यु दर में 8 लाख तक कम की जा सकती है। और 46% बच्चे ही छह माह के होने तक मां का दूध पी पाते हैं।
आपको बता दें कि ब्राजील में ब्रेस्ट मिल्क का सबसे बड़ा नेटवर्क है। और डोनर मांओं के दूध से यहां 73% मृत्यु दर कम हुई है जो एक बड़ा सफलता है। 1569.79
लीटर मिल्क डोनेशन का गिनीज रिकॉर्ड भी ब्राजीक के नाम ही है। वैसे 2011 से 2014 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी मायें मिल्क डोनेशन में सबसे अव्वल हैं। यह आंकड़ा जनवरी वर्ष 2011 से मार्च 2014 तक का है। भारत में भी मायें शिशुओं के जीवन के लिए आगे आयें तो बड़ी कामयाबी मिल सकती है।