मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा पाठ को लेकर अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति निर्दलीय विधायक रवि राणा का शिवसेना से विवाद नया नहीं है। यह विवाद नवनीत राणा की शादी के तीन साल बाद यानि 2014 से ही शुरू हो गया था जो अब संघर्ष में तब्दील हो गया है।
नवनीत राणा पिछले लोकसभा चुनाव में शिवसेना के दिग्गज नेता व पांच बार सांसद रहे आनंदराव अडसूल को पराजित किया था। जबकि इससे पहले 2014 के चुनाव में वह एनसीपी की प्रत्याशी थीं और आनंदराव अडसूल से पराजित हो गई थीं। जानकार बताते हैं कि नवनीत कौर साल 2011 में अमरावती में आयोजित 4120 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह में निर्दलीय विधायक रवि राणा के साथ परिणय सूत्र में बंधी थीं।
रवि राणा से शादी करने के तीन साल बाद 2014 में नवनीत राणा बतौर एनसीपी उम्मीदवार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरी थीं। तभी से शिवसेना उनके निशाने पर आ गई थी। उसके बाद राणा दंपत्ति और शिवसेना के बीच विवाद गहराता गया। अमरावती शिवसेना का गढ़ बन गया था, आनंदराव अडसूल 1996 से लगातार चुनाव जीतते रहे। 2019 में नवनीत ने उन्हें चित किया, जिससे खाई और चौड़ी हो गई।
नवनीत का आरोप.. पुलिस ने नीच जाति बताकर पानी तक नहीं दिया
हनुमान चालीसा पाठ विवाद पर देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने मुंबई पुलिस पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाते हुए कहा, मुझे नीच जाति का कहकर पानी नहीं दिया गया। पुलिस ने बाथरूम (शौचालय) जाने तक की इजाजत न देकर मुझे बुनियादी मानव अधिकार से वंचित रखा।
राणा दंपती को जमानत नहीं, कोर्ट ने कहा बड़े पद के साथ बड़ी जवाबदेही जरूरी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने के विवाद में गिरफ्तार सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा जेल में ही रहेंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा, जनप्रतिनिधि होने से उनकी जवाबदेही भी बड़ी है। बड़ा पद है तो बड़ी जिम्मेदारी भी निभाएं।
अदालत ने इतनी राहत जरूर दी कि दूसरी एफआईआर में गिरफ्तारी से पहले पुलिस को 72 घंटे पहले नोटिस देना होगा। वहीं, अमरावती में सांसद नवनीत के घर के बाहर हंगामे के आरोप में गिरफ्तार 16 शिवसैनिकों को मुंबई की अदालत ने जमानत दे दी। राणा दंपती पर सीएम ठाकरे के खिलाफ टिप्पणियाें पर देशद्रोह, द्वेष फैलाने व लोकसेवक के कर्तव्य निर्वहन में नाकाम रहने व निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले दर्ज हैं।
जिम्मेदार लोगों से इतनी अपेक्षा तो की ही जाती है कि उन्हें जिम्मेदारी की भावना से बोलना चाहिए। किसी के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ना किसी की निजी स्वतंत्रता का हनन है। राणा दंपती की वजह से कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई थी।
-बॉम्बे हाईकोर्ट