गुजरात में एक परिवार ने इतिहास रचते हुए चार दशकों में करीब 630 लीटर रक्तदान किया है। परिवार के एक सदस्य डॉ. मौलिन पटेल ने बताया कि उनमें से चार लोग 'शतकवीर' हैं, क्योंकि उन्होंने 100 से अधिक बार रक्तदान किया है। जबकि 44 वर्षीय डॉ. मौलिन पटेल गुजरात में सबसे कम उम्र के शतकवीर रक्तदाता हैं।
पटेल परिवार में चार लोगों में 100 बार किया रक्तदान
डॉ. मौलिन पटेल के अनुसार, पटेल परिवार की तीन पीढ़ियों में 16 लोगों ने 50 से अधिक बार रक्तदान किया है। उनके पिता अशोक पटेल (72) और मां शकुंतला (71) ने 98 बार रक्तदान किया है। डॉ. मौलिन ने कहा, वे एक हफ्ते पहले ही अमेरिका गए थे और वहां पर रक्तदान किया। क्योंकि भारत में आप 65 वर्ष की आयु के बाद रक्तदान नहीं कर सकते, जबकि अमेरिका में कोई आयु सीमा नहीं है। उन्होंने रक्तदान का अपना शतक पूरा करने के बाद ही भारत लौटने का फैसला किया है।
हर तीन महीने में आयोजित किया जाता है रक्तदान शिविर
यह सब फरवरी 1985 में शुरू हुआ जब मेरे चाचा रमेश पटेल, जो पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे, एक कार्यक्रम में शामिल हुए जहां सत्य साईं बाबा ने कहा था रक्त तरल प्रेम है, इसे दूसरों में प्रवाहित करें। बाबा के संदेश से प्रभावित होकर, मेरे चाचा ने उसी वर्ष यहां पहली बार एक मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया ताकि रेड क्रॉस को थैलेसीमिया रोगियों को रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिल सके। इससे परिवार के अन्य सदस्यों को नियमित रक्तदाता बनने की प्रेरणा मिली। वे अब अपने घर पर हर तीन महीने में रक्तदान शिविर आयोजित करते हैं और रिश्तेदारों और दोस्तों को आमंत्रित करते हैं।
वहीं 76 वर्षीय रमेश पटेल 94 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनके भतीजे मौलिन ने कहा कि आयु सीमा और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने कुछ साल पहले रक्तदान करना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा, हम सभी 27 सदस्यों ने अब तक लगभग 1,400 यूनिट रक्तदान किया है, जो लगभग 630 लीटर के करीब है, क्योंकि एक यूनिट में आमतौर पर 450 मिली लीटर रक्त होता है।
अहमदाबाद में 130 से ज्यादा शतकवीर रक्तदाता
परिवार के अन्य तीन शताब्दी रक्तदाता रमेश पटेल की बेटी डिंपल, बेटा अमूल और रमेश पटेल के भाई भरत पटेल हैं। अहमदाबाद रेड क्रॉस के मानद अध्यक्ष मुकेश पटेल ने पटेल परिवार के असाधारण रिकॉर्ड की सराहना की। प्रसिद्ध कर सलाहकार मुकेश पटेल ने कहा कि भारत में रक्तदान आंदोलन की शुरुआत 1963 में अहमदाबाद से हुई थी और इसके अग्रदूतों में डॉ. वीजी मावलंकर और डॉ. वीके वाणी शामिल थे। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में शहर के लोग इसमें शामिल हुए और इसकी गति को बनाए रखा है। लोगों को रक्तदान पर गर्व होने लगा। अहमदाबाद शहर में अब भारत में सबसे अधिक 130 शताब्दी रक्तदाता हैं।