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मोरबी पुल हादसा: मामले में सात आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, इनमें ओरेवा समूह के दो प्रबंधक भी शामिल

Sat, 04 Feb 2023 05:54 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

ओरेवा समूह के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल ने अपनी गिरफ्तारी से पहले एक फरवरी को यहां एक अदालत में आत्मसमर्पण किया था। मोरबी पुलिस ने पिछले हफ्ते इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें पटेल समेत अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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मोरबी पुल हादसा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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गुजरात के मोरबी शहर में एक झूला पुल गिरने के मामले में गिरफ्तार सात लोगों की जमानत याचिका यहां की एक अदालत ने शनिवार को खारिज कर दी। प्रधान सत्र न्यायाधीश पीसी जोशी की अदालत ने पुल के संचालन और रखरखाव का ठेका देने वाली कंपनी ओरेवा समूह के दो प्रबंधकों सहित सात आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। मच्छू नदी पर ब्रिटिश काल का पुल मरम्मत के बाद फिर से खोले जाने के कुछ दिनों बाद 30 अक्तूबर 2022 को ढह गया था।

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ओरेवा समूह के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल ने अपनी गिरफ्तारी से पहले एक फरवरी को यहां एक अदालत में आत्मसमर्पण किया था। मोरबी पुलिस ने पिछले हफ्ते इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें पटेल समेत अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य नौ गिरफ्तार व्यक्तियों में फर्म के दो प्रबंधक, दो टिकट बुकिंग क्लर्क, तीन सुरक्षा गार्ड और दो उप-ठेकेदार शामिल हैं, जो ओरेवा समूह द्वारा मरम्मत कार्य के लिए लगाए गए थे।

इन नौ व्यक्तियों की जमानत याचिका पहले गुजरात उच्च न्यायालय और सत्र न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई थी। दो उपठेकेदारों को छोड़कर अन्य सात ने गुरुवार को एक बार फिर जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले एक विशेष जांच दल (एसआईटी), जिसे राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए गठित किया था, ने फर्म की ओर से कई खामियों का हवाला दिया था।
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एसआईटी के अनुसार, खामियों में पुल तक पहुंचने वाले व्यक्तियों की संख्या पर प्रतिबंध का अभाव और टिकटों की बिक्री पर कोई अंकुश नहीं था, जिसके कारण संरचना पर अप्रतिबंधित आवाजाही हुई। इसके साथ ही विशेषज्ञों से परामर्श किए बिना ही पुल की मरम्मत की गई। जांच से पता चला था कि फर्म द्वारा इस्तेमाल किए गए नए धातु के फर्श ने संरचना का वजन बढ़ा दिया था और यह जंग लगी केबलों को बदलने में विफल रही थी, जिस पर पूरा पुल लटका हुआ था।

एसआईटी ने कहा कि इसके अलावा, पटेल की फर्म द्वारा काम पर रखे गए ठेकेदार इस तरह की मरम्मत और नवीनीकरण कार्य करने के लिए योग्य नहीं थे। जांच रिपोर्ट से यह भी पता चला कि ओरेवा ग्रुप ने मरम्मत और नवीनीकरण कार्य के बाद इसे जनता के लिए खोलने से पहले कैरेजवे की भार वहन क्षमता का आकलन करने के लिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी को नियुक्त नहीं किया था।

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