गुजरात में अगले साल विधानसभा के चुनाव होंगे और चुनाव से पहले जिस तरीके का फेरबदल हुआ है, वह राजनीति में सबसे 'विस्फोटक' फेरबदल माना जाता है। मुख्यमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट तक बदल दी गई। गुजरात की जो कैबिनेट बनी है, उसे मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक सब पहली दफा अपना पोर्टफोलियो संभालने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरीके से गुजरात में इतना बड़ा फेरबदल हुआ है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होगा या नहीं, लेकिन पहली बार मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री शासन सत्ता का अनुभव न होने के चलते ब्यूरोक्रेसी पर निर्भरता जरूर ज्यादा बढ़ जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड और कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदला। बात जब गुजरात में मुख्यमंत्री बदलने की आई तो राजनीतिक चर्चाएं सबसे ज्यादा होने लगीं। उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गुजरात देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य भी है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तब होनी शुरू हुई, जब नए मंत्रिमंडल में सभी बनाए गए मंत्री पहली दफा मंत्री बने थे। राजनीतिक विशेषज्ञ और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस शंभूभाई पटेल कहते हैं गुजरात में एक साथ पहली बार अनुभवहीन मंत्रियों को बहुत बड़ा पोर्टफोलियो दिया गया है। वे कहते हैं कि मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक का शासन सत्ता चलाने का पहले कोई भी अनुभव नहीं है। ऐसे में जब चुनाव सिर पर है, तो निश्चित तौर पर भाजपा इस तरह के फेरबदल को मास्टर स्ट्रोक के तौर पर ही देख रही होगी। हालांकि शंभू भाई पटेल का कहना है कि कैबिनेट जरूर नई है, लेकिन जिस तरीके से जातिगत समीकरणों को भारतीय जनता पार्टी ने साधा है वह विजय रूपाणी के दौर में हुई जातिगत समीकरणों की अस्थिरता को निश्चित तौर पर रोकने का काम कर सकती है।