जडेजा परिवार ने चार बच्चों समेत 7 लोग खोए
दो जडेजा भाइयों प्रतापसिंह और प्रद्युम्नसिंह के परिवार के सात लोग मां, पत्नियां और चार बच्चे मोरबी हादसे की भेंट चढ़ गए। मोरबी के स्थानीय मंदिर से पूजा कर लौट रहे जडेजा परिवार ने सोचा भी नहीं होगा कि झूलता पुल पर जाने की बच्चों की जिद उन्हें जीवन भर का दर्द दे जाएगी।
- जडेजा भाइयों के चचेरे भाई कनक सिंह जडेजा ने बताया कि घटना के समय दोनों भाई मोरबी में अपने होटल में थे। रात में उन्होंने पाया कि घर बंद है। परिवार के किसी सदस्य का फोन भी नहीं चल रहा था। उन्हें पुल हादसे का पता चला तो वे घबराए हुए वहां पहुंचे। रात दस बजे उन्हें अस्पताल में सबसे पहले मां का शव मिला।
- पत्नियों और बच्चों के शव देर रात वहां पहुंचे। बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच थी। जडेजा परिवार के करीब मित्र नरेंद्र सिंह जडेजा ने कहा कि दोनों भाइयों का परिवार आपस में बेहद करीब था। उन्होंने कहा, मैं बता नहीं सकता मैं कितना गुस्से में और असहाय महसूस कर रहा हूं।
सबसे दुखद बच्चों की मौत रही। लोग बदहवास हालत में अस्पताल की तरफ भाग रहे थे। जो लोग पुल को पकड़कर लटके हुए थे, उन्हें सिर्फ असहाय होकर देखना पड़ा। क्योंकि वहां तक जाने का कोई भी रास्ता नहीं था। बाद में जो लोग नदी में गिर गए, वे या तो डूब गए या फिर जो तैरना जानता था, वह किसी तरह किनारे की तरफ पहुंचा। - एक चश्मदीद
दुनिया स्तब्ध...बाइडन, पुतिन, इस्राइली पीएम समेत कई विश्व नेताओं ने जताया शोक
मोरबी हादसे पर अमेरिकी राष््ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के राष्ट्र और शासन प्रमुखों ने दुख जताया है। पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे संदेश में कहा, हमारी ओर से हार्दिक संवेदनाएं स्वीकार करें। श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे संदेश में कहा कि वे श्रीलंका की ओर से गहन सांत्वना व्यक्त करते हैं। उन्होंने घायलों की सेहत में जल्द सुधार की कामना की। इसी तरह नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सोशल मीडिया के जरिए लिखा, ‘इस हादसे में बहुमूल्य जीवन की हानि होने पर हम हार्दिक सांत्वना व्यक्त करते हैं। हमारी प्रार्थनाएं दुख में डूबे परिवारों के साथ हैं।’ एजेंसी
- बाइडन ने कहा, आज हमारा दिल भारत के साथ है। मैं व जिल हादसे में प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति दुख जताते हैं।
- फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लिनेन ने लिखा, उनका देश मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
- कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैके ने कहा कि इस घटना से उनके दिल टूट रहे हैं।
- इस्राइल के पीएम यैर लापिड ने कहा, हमारी प्रार्थना भारत के लोगों के साथ है।
- भूटान के पीएम लोते शेरिंग ने लिखा, हादसे ने स्तब्ध कर दिया।
- बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल को लिखे पत्र में कहा, हम मृतकों के लिए प्रार्थना करते हैं और अपने प्रियजनों को गंवा चुके परिवारों को सांत्वना देते हैं।
- चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा किमारे गए लोगों के लिए दुखी हैं। मृतकों और घायलों के परिजनों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हैं।
- पोलैंड के विदेश मंत्री बिगनियू रू ने गहरी संवेदना प्रकट की, कहा, गुजरात पोलैंड-भारत के रिश्तों में खास स्थान रखता है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजियों के आक्रमण के दौरान जामनगर के तत्कालीन राजा दिग्विजय रंजीत सिंह जडेजा ने पोलैंड के एक हजार बच्चों को शरण दी थी। पोलैंड के चित्रकार स्टीफन नोर्बलिन ने जडेजा के महल में चित्रकारी की थी।
कांग्रेस ने की हादसे की न्यायिक जांच की मांग
कांग्रेस ने मोरबी पुल हादसे की न्यायिक जांच की मांग की है। पार्टी ने इसे आपराधिक लापरवाही और गंभीर कुशासन करार दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, इतने लोगों को पुल पर जाने की इजाजत क्यों दी गई। मामले में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत पहुंच चुके हैं। जहां तक संभव होगा हम पीड़ितों की मदद का प्रयास कर रहे हैं।
बिखर गए परिवार : अनाथ हुआ 4 साल का जियांश, किसी के घर से उठीं चार अर्थियां
किसी ने औलाद खो दी, किसी ने जीवन साथी। किसी की कोख में ही उसकी औलाद की कब्र बन गई। किसी के अपने उसकी आंखों के आगे डूब गए। मोरबी में रहने वाले हार्दिक फलदू पत्नी मिरल और चार साल के बेटे जियांश के साथ ब्रिज पर घूमने गए थे। हादसे में हार्दिक और पत्नी मिरल की मौत हो गई। लेकिन डूब रहे जियांश को तो किसी ने बचा लिया लेकिन अब उसके सिर पर माता-पिता का साया नहीं रहा।
पत्नी-बेटे की लाश मिली, बेटी समेत 5 परिजन लापता आरिफ परिवार के 8 सदस्यों के साथ घूमने गए थे। ब्रिज टूटने से सभी लोग नदी में गिर गए। हादसे में आरिफ की जान बच गई, लेकिन पत्नी और 5 साल के बेटे की जान चली गई। वहीं, बेटी समेत 5 सदस्य लापता हैं।
आंखों के सामने डूबे 6 परिजन बेटी की ननद की सगाई में आई हलीमाबेन के परिवार के 6 लोग उसकी आंखों के सामने हादसे का शिकार हो गए। हलीमा ने बताया कि उनकी बेटी-दामाद, दोनों नवासे, हलीमा के जेठ और उनका लड़का पुल देखने गए थे, लेकिन उसके टूटने से नदी में गिर गए।
दावा : पुल पर 1000 से ज्यादा लोग जमा थे
हादसे में 8 लोगों की जान बचाने वाले चश्मदीद ने कहा- यहां हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। जो तैरना जानते थे, वो तैरकर बाहर आ रहे थे। बच्चे डूब रहे थे, हमने पहले उन्हें बचाया। उसके बाद बड़ों को निकाला। पाइप के सहारे लोगों को निकाल रहे थे।
तार के सहारे बचा रूपेश, बच्चों को बचाने में डूबी पत्नी
जामनगर के धरोल तालुका के जलिया देवानी गांव निवासी रूपेशभाई की पत्नी हंसाबेन, 8 साल का तुषार, 5 साल का श्याम और 2 साल की माया भी हादसे के शिकार हुए। रूपेश ब्रिज की केबल पकड़ने से बच गया, जबकि पत्नी तीनों बच्चों को खोजने गई, लेकिन कीचड़ में धंसकर जान गंवा दी।
6 साल की बहन संग फोटो ले रहा था, फिर वह नहीं मिली
मजदूरी करने वाला एक युवक पहली बार झूलता पुल देखने आया था। एक लड़का अपनी 6 साल की बहन के साथ पुल पर फोटो ले रहा था। पुल गिरा, दोनों नदी में गिर गए। लड़का तो बच गया, पर उसकी मासूम बहन लापता हो गई। हॉस्पिटल में खोजने के बावजूद वह नहीं मिली। अब वह घटनास्थल पर रोता हुआ अपनी बहन को खोज रहा है।
मंदिर में काम कर रहे थे, 8 को बचाया
चश्मदीद सुभाषभाई ने कहा कि हम पुल के बगल में स्वामीनारायण मंदिर के निर्माण में काम कर रहे थे। पुल टूटते ही हम तुरंत दौड़े और 8 की जान बचाई। दूसरे लोगों को नहीं बचा सके। बड़े लोग पुल की रस्सी के सहारे बाहर निकले, लेकिन छोटे बच्चे नदी से बाहर नहीं निकल पाए।
- मातम का अंधेरा, दिवाली की रोशनियां बंद : दिवाली पर जहां कल तक पूरा मोरबी लाइटों से जगमगा रहा था। वहीं, रविवार शाम को हुए हादसे ने शहरवासियों को मातम के अंधेरे में डुबो दिया। लोग, अस्पतालकर्मी, पुलिस, फायर ब्रिगेड सभी बचाव कार्य में लगे रहे।
जान बचाते-बचाते कब सुबह हो गई, पता नहीं चला
हसीना बेन नाम की एक स्थानीय महिला ने भयानक मंजर को बताते हुए रोती रही। उसने कहा, मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि सुबह कब हुई। मैं और मेरा परिवार पूरी रात लोगों को अस्पताल ले जाने में शामिल रहा। मैंने अपने दोनों वाहन घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए लोगों को दे दिए। जब मैं मरे हुए बच्चों को अस्पताल ले जाने के बारे में सोच रही थी तो मैं हिल गई। लोगों के रोने की आवाजें, चिल्लाना। वहां के दृश्य ने मुझे तोड़ दिया। मैं इसके बारे में बोल भी नहीं सकती... और यह कहते-कहते वह फिर से रोने लगीं।