हाउसिंग सोसायटी या आवासीय परिसरों में आरडब्ल्यूए की ओर से अपने सदस्यों को दी गई सेवा जीएसटी के दायरे में नहीं होगी, बशर्ते वहां मासिक योगदान राशि 5000 रुपये तक हो। आरडब्ल्यूए को जीएसटी के तहत तभी कर देना होगा जब सदस्यों का मासिक शुल्क 5000 रुपये से अधिक और आरडब्ल्यूए का वार्षिक कारोबार 20 लाख रुपये या इससे ज्यादा हो।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि आरडब्ल्यूए की सेवाएं जीएसटी के तहत महंगी होने की खबरें बेबुनियाद हैं। जीएसटी में आरडब्ल्यूए की ओर से अपने सदस्यों को मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं को टैक्स फ्री रखा गया है।
हालांकि कर से छूट की अधिकतम सीमा प्रति सदस्य 5000 रुपये मासिक योगदान तक ही है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई आरडब्ल्यूए, जिसका वार्षिक कारोबार 20 लाख रुपये तक ही है लेकिन सदस्यों की योगदान राशि 5000 रुपये महीने से ज्यादा है, तो भी उसकी सेवाओं पर जीएसटी से छूट मिलेगी।
सरकार का कहना है कि जीएसटी के तहत आरडब्ल्यूए पर कर का बोझ कम होगा, क्योंकि जेनेरेटर, वाटर पंप, लॉन फर्नीचर जैसी पूंजीगत वस्तुएं, नलका-टोंटी ,पाइप, साफ-सफाई के अन्य उपकरण जैसे सामानों तथा मरम्मत और रखरखाव सेवाओं पर उनके द्वारा भुगतान किए गए कर के संदर्भ में आरडब्ल्यूए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पाने के हकदार होंगे।
जीएसटी लागू होने से पहले पूंजीगत वस्तुओं एवं अन्य वस्तुओं पर दिए जाने वाले कर पर आईटीसी की सुविधा नहीं थी। अब आरडब्ल्यूए का इस मद में खर्च कम हो गया है।
बोर्डिंग स्कूलों में बोर्डिंग चार्ज पर जीएसटी नहीं
सरकार ने साफ किया है कि शैक्षणिक संस्थानों के छात्रावासों में रहने या खाने के वार्षिक शुल्क पर जीएसटी नहीं लगेगा। इन सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगने की खबरें गलत है।
एसबीआई ने ई-ट्रांजेक्शन शुल्क घटाया
एसबीआई ने इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग से किए जाने वाले एनईएफटी और आरटीजीएस ट्रांजेक्शन पर शुल्कों में 75 फीसदी तक की कटौती कर दी है। यह फैसला शनिवार से लागू होगा।