देशभर में एक समान कर प्रणाली, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की राह की एक और बाधा सोमवार को दूर हो गई। सरकार ने जीएसटी काउंसिल बनाने संबंधी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। यही काउंसिल जीएसटी की दर तय करने से लेकर इसके सभी अहम फैसले करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी काउंसिल के गठन से संबंधित अधिसूचना 10 सितंबर 2016 को जारी हुई है, जिसमें डेट आफ अपाइंटमेंट 12 सितंबर 2016 तय किया गया है। डेट आफ अपाइंटमेंट इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसी दिन को आधार बना कर गणना की जाएगी। नियमानुसार डेट आफ अपाइंटमेंट से 60 दिनों के अंदर जीएसटी काउंसिल का गठन होना अनिवार्य है। अमर उजाला ने बीते तीन सितंबर को ही खबर दी थी कि जीएसटी काउंसिल के बारे में एक सप्ताह में अधिसूचना जारी होने की संभावना है।
जीएसटी काउंसिल का मुख्य काम जीएसटी के तहत टैक्स की दरें और बैंड तय करना होगा। काउंसिल यह भी तय करेगी की किस वस्तु और सेवा पर टैक्स लगाना है व किस पर नहीं, पेट्रोलियम उत्पादों पर कब से जीएसटी लगाना है, कौन से टैक्स, सरचार्ज, सेस जीएसटी के दायरे में रहेंगे आदि। इसके अलावा मॉडल जीएसटी कानून को मंजूरी प्रदान करना, टैक्स लगाने के सिद्धांत और रूप रेखा तय करना, जीएसटी के दायरे में आने के लिए किसी कारोबारी की न्यूनतम कारोबार सीमा (थ्रेसहोल्ड लिमिट) तय करना और विवादों के निपटारे के तरीके सुझाना भी इस काउंसिल की कार्यसीमा में शामिल हैं।
जीएसटी काउंसिल में केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष होंगे और केंद्र सरकार में राजस्व विभाग का प्रभार देखने वाले वित्त राज्य मंत्री सदस्य होंगे। सभी राज्यों के वित्त मन्त्री भी इसके सदस्य होंगे। काउंसिल में सभी फैसले उपस्थित सदस्यों की दो तिहाई बहुमत से लिए जाएंगे। वोटिंग में केंद्र सरकार का वेटेज एक तिहाई और सभी राज्यों का कुल मिलाकर वेटेज दो तिहाई होगा।