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पहल: एनएसए में दर्ज मामलों की समीक्षा के लिए सलाहकार बोर्ड का गठन, बताएगा हिरासत में लेने के पर्याप्त कारण हैं या नहीं

Sat, 19 Mar 2022 05:38 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

एनएसए के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके खिलाफ आरोप बताए बिना 10 दिनों तक रखा जा सकता है। इसके अलावा भी इसमें कई सख्त प्रावधान हैं। 
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एनएसए हिरासत के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गृह मंत्रालय ने कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों वाले एक सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। एनएसए किसी व्यक्ति को बिना किसी आरोप के एक वर्ष तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। 1980 के अधिनियम की धारा 9 के तहत सलाहकार बोर्ड का गठन किया गया है। एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जस्टिस योगेश खन्ना सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष होंगे, जबकि जस्टिस चंद्रधारी सिंह और जस्टिस रजनीश भटनागर उच्चाधिकार प्राप्त निकाय के सदस्य होंगे।

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एनएसए में कई सख्त प्रावधान 
एनएसए सरकार को किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानने या सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने से रोकने के लिए उसे हिरासत में लेने का अधिकार देता है। एनएसए के तहत किसी व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके खिलाफ आरोप बताए बिना 10 दिनों तक रखा जा सकता है। बंदी राहत के लिए केवल सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन मुकदमे के दौरान वकील को अनुमति नहीं दी जाती है। प्रत्येक एनएसए बंदी के मामले में संबंधित सरकार हिरासत की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर सलाहकार बोर्ड के समक्ष उन आधारों को प्रस्तुत करेगी जिन पर आदेश दिया गया है। 

सलाहकार बोर्ड बताएगा हिरासत में लेने का कारण उचित है या नहीं
सलाहकार बोर्ड अपने समक्ष रखी गए मामले पर विचार करने के बाद और बंदी की बात सुनने के बाद संबंधित व्यक्ति की हिरासत की तारीख से सात सप्ताह के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। बोर्ड की रिपोर्ट में यह निर्दिष्ट किया जाएगा कि हिरासत के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं। ऐसे मामलों में जहां सलाहकार बोर्ड अगर बताता है कि संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए पर्याप्त कारण हैं, सरकार हिरासत आदेश की पुष्टि कर सकती है और उस अवधि के लिए हिरासत जारी रख सकती है। 
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ऐसे मामलों में जहां बोर्ड ने रिपोर्ट किया है कि हिरासत का कोई पर्याप्त कारण नहीं है, सरकार हिरासत आदेश को रद्द कर देगी और बंदी को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। एक हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना जेल में रखा सकता है, लेकिन यह छह महीने से अधिक नहीं हो सकता है। 

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