कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई। परंतु किसान यूनियन कानून वापसी पर अड़ी रही। सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए। परंतु जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता। तोमर ने कहा कि कुछ तो ऐसी ताकत है, जिसकी वजह से फैसला नहीं हो पा रहा है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह भी कहा कि वार्ता के दौर में मर्यादाओं का तो पालन हुआ, परंतु किसानों के हक में वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो, इस भाव का सदा अभाव था। इसलिए वार्ता निर्णय तक नहीं पहुंच सकी। इसका मुझे भी खेद है।
फैसले पर पहुंच जाएं तो बताएं
तोमर ने कहा कि हमने किसान यूनियन को कहा कि जो प्रस्ताव आपको दिया है- 1 से 1.5 वर्ष तक कानून को स्थगित करके समिति बनाकर आंदोलन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने का प्रस्ताव बेहतर है, उस पर फिर से विचार करें।
हमने यह भी कहा कि आज वार्ता को पूरा करते हैं, आप लोग अगर निर्णय पर पहुंच सकते हैं तो आप कल (शनिवार) अपना मत बताइए। निर्णय घोषित करने पर आपकी सूचना पर हम कहीं भी इकट्ठा हो सकते हैं।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की तरफ से कहा गया कि 1.5 साल की जगह 2 साल तक कृषि क़ानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा अगर इस प्रस्ताव पर किसान तैयार हैं तो कल फिर से बात की जा सकती है, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया।
बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि सरकार की तरफ से कहा गया कि डेढ़ साल की जगह दो साल तक कृषि कानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा अगर इस प्रस्ताव पर किसान तैयार हैं तो कल फिर से बात की जा सकती है, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया।
मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतजार करवाया: एसएस पंधेर
किसान मजदूर संघर्ष समिति के एसएस पंधेर ने कहा कि मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतजार करवाया। यह किसानों का अपमान है। जब वह आए, तो उन्होंने हमसे सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कहा।
सरकार ने एमएसपी पर भी समिति बनाने का दिया प्रस्ताव
एक किसान नेता ने बताया कि, सरकार ने आज ये प्रस्ताव भी दिया कि हम एक कमेटी कृषि कानून पर बना देते हैं और एक कमेटी एमएसपी पर बना देते हैं। दोनों समितियां अपनी रिपोर्ट देंगी और हम डेढ़ की बजाय दो साल के लिए कानूनों पर रोक लगा देते हैं। लेकिन सरकार ने पहले बनाई गई किसी समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया तो हम कैसे मान लें इन समितियों की सिफारिश सरकार मानेगी।