यूं तो दुनियाभर में हर साल चुनाव होते हैं, कई मुल्कों की सरकारें चुनी जाती हैं। लेकिन, 2024 इस लिहाज से बेहद अहम है, क्योंकि इस साल दुनिया के 70 मुल्कों की सरकारें चुनी जानी हैं। इन 70 देशों में दुनिया के सबसे बड़े और पुराने लोकतंत्र भारत और अमेरिका भी शामिल हैं। इसके अलावा ब्रिटेन, रूस, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, श्रीलंका और ताइवान जैसे देशों में चुनाव होने हैं। दुनियाभर के इन 70 देशों में 4 अरब मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर मोटे तौर पर आने वाले कई वर्षों के लिए दुनिया की दिशा तय करेंगे।
इसके अलावा यह वर्ष पश्चिमी एशिया व यूक्रेन के लिहाज से भी अहम साबित होगा। अमेरिकी सीनेट में जिस तरह से यूक्रेन के लिए दी जाने वाली वित्तीय मदद के प्रस्ताव को रोका गया है, उससे इस बात की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं कि रूस इस साल यूक्रेन कथित विसैन्यीकरण के अपने लक्ष्य में कामयाब हो जाएगा। वहीं, पश्चिमी एशिया में इस्राइल की तरफ से हमास को समूल नष्ट करने की जिद नए और बड़े युद्ध को भड़का सकती है।
युद्ध और राजनीति से परे यह साल तकनीक और जलवायु परिवर्तन के लिहाज से भी अहम साबित हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के इतिहास में 2023 को उस वर्ष के तौर पर अंकित किया जाएगा, जब दुनिया ने जलवायु परिवर्तन से उपजे संकटों का प्रत्यक्ष सामना किया। वहीं, 2024 मानवता के सामने वह अवसर लेकर आया है, जो 2023 की त्रासदियों से सबक लेते हुए जीवाश्म ईंधन से लेकर तमाम दूसरे मोर्चों पर बैक गियर में चलने की संभावनाएं पेश करता है। खासतौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिहाज से यह वर्ष अहम साबित हो सकता है।
चिंता यह भी...चीन और अमेरिका के बीच जारी आर्थिक युद्ध के नए शीत युद्ध में बदलने की आशंका
2024 की दुश्चिंताओं के लिहाज से बात करें, तो अमेरिका में रिपब्लिकन सरकार बनने पर चीन और अमेरिका के बीच जारी आर्थिक युद्ध नए शीत युद्ध में तब्दील हो सकता है। जाहिर, अमेरिका और चीन की इस खींचतान की वजह से पूरी दुनिया को खामियाजा उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में दुनिया की आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। क्योंकि, चीन की सरकार घटती विकास दर के प्रभावों से घरेलु मोर्चे पर घेरे जाने से बचने के लिए ताइवान पर कब्जे के सैन्य प्रयास कर सकती है।
खुशी भी...ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों से दुनिया होगी एकजुट
हालांकि, 2024 में सबकुछ बांटने वाला ही नहीं है। 2024 में फ्रांस ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों का आयोजन करेगा। इससे दुनिया को एकजुट होने का अवसर मिलेगा। खासतौर पर अगर रूस की इन खेलों में भागीदारी होती है, तो यूरोप में यूक्रेन के लिहाज से हालात सामान्य करने की दिशा में एक द्वार खुल सकता है। इसके अलावा भारतीय उपमहाद्वीप के लिहाज से टी-20 विश्वकप भी होने वाला है।