मणिपुर में जातीय हिंसा ने राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार को हिला कर रख दिया। हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री अमित शाह खुद दौरे पर आए थे। वहीं, अब मणिपुर सरकार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा में कम से कम 98 लोगों की जान चली गई और 310 अन्य घायल हो गए। साथ ही बताया कि वर्तमान में कुल 37,450 लोग 272 राहत शिविरों में हैं।
मणिपुर में तीन मई को भड़की हिंसा के बाद से आगजनी के कुल 4,014 मामले सामने आए हैं। हिंसा में मौतों की संख्या 98 है और घायलों की संख्या 310 है। बयान में कहा गया है कि पिछले एक महीने में राज्य पुलिस ने 3,734 मामले दर्ज किए हैं और 65 लोगों को हिंसा में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
सेना, असम राइफल्स, सीएपीएफ और स्थानीय पुलिस को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। बयान में कहा गया है कि अब तक केंद्रीय सशस्त्र बलों की 84 कंपनियों को तैनात किया गया है। बयान में कहा गया है कि और कंपनियां तैनात की जा रही हैं। फ्लैग मार्च और एरिया डोमिनेशन एक्सरसाइज व्यापक रूप से की जा रही हैं। छीने गए हथियार और गोला-बारूद बरामद करने के लिए आज से तलाशी अभियान चलाया जाएगा।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने लोगों से लूटे गए हथियार और गोला-बारूद को सरेंडर करने की अपील की। छीने हुए हथियार और गोला-बारूद के साथ पकड़े जाने पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बयान में कहा गया है कि अब तक सुरक्षा एजेंसियों ने 11 मैगजीन के साथ 144 हथियार बरामद किए हैं।
आगे बयान में कहा कि इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर और फिरजावल में 12 घंटे, कांगपोकपी में 11 घंटे, चुराचंदपुर और चंदेल में 10 घंटे, जिरिबाम और तेनुगोपाल में आठ घंटे और थौबल और काकचिंग जिलों में सात घंटे के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई है। तमेंगलोंग, नोनी, सेनापति, उखरुल और कामजोंग में कोई कर्फ्यू नहीं है।
बयान में कहा गया है कि एनएच -37 के साथ आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही सुनिश्चित की गई है, यह देखते हुए कि लगभग 450 ट्रक आवश्यक वस्तुओं के साथ चल रहे थे। गृहमंत्री अमित शाह के चार दिवसीय दौरे के समापन और सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए कई उपायों की घोषणा करने के एक दिन बाद मणिपुर में एक असहज शांति व्याप्त है।