पैरासिटामॉल को भी भारत ने प्रतिबंधित निर्यात की सूची से हटा लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशलय ने शुक्रवार को ही यह अधिसूचना जारी की है। सूत्र बताते हैं कि फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन दिनेश दुआ की सिफारिश पर वाणिज्य मंत्रालय ने शीर्ष स्तर पर विचार करके यह निर्णय लिया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 संक्रमण के फैलाव में पैरासिटामॉल का भी योगदान है। विदेश से आने वाले लोग अपने बुखार को छिपाने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट या बीच में पैरासिटामॉल खा लेते थे। इसके कारण भारतीय हवाई अड्डों पर होने वाली थर्मल स्क्रीनिंग में लोग बच गए थे।
वहां शरीर का सामान्य तापमान होने के कारण एजेंसियों ने ऐसे लोगों को घर या अगले स्थान के लिए जाने दिया। आरएमएल के वरिष्ठ चिकित्सक का मानना है कि इनमें से कुछ लोग कोविड-19 से संक्रमित थे और बाद में इन्होंने तमाम लोगों को संक्रमित कर दिया।
अतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरासीटामॉल की काफी मांग है। इस समय हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के बाद पैरासिटामॉल की मांग सबसे ज्यादा है। प्रतिदिन के हिसाब से मानें तो करीब दो हजार टन पैरासिटामॉल की मांग रहती है।