गृह मंत्रालय विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक द्वारा स्थापित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) की फंडिंग की जांच कर रहा है। आरोप है कि विदेश से मिले पैसों का खर्च राजनीतिक गतिविधियों के अलावा लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा के लिए प्रेरित करने के लिए किया गया।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईआरएफ के फंडिंग की जांच चल रही है। हालांकि, कुछ मुस्लिम शिक्षाविदों और धार्मिक विद्वानों ने मंगलवार को कहा नाईक के खिलाफ कोई भी कदम सावधानी के साथ उठाया जाना चाहिए।
गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, जाकिर का आईआरएफ फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत है। उन्होंने कहा कि यह पाया गया है कि उसे ज्यादातर पैसे यूनाइटेड किंगडम (यूके), सऊदी अरब और मध्य-पूर्व के कुछ अन्य देशों से प्राप्त हुए हैं।
अधिकारी के अनुसार, 2012 से पहले के पांच वर्षों में आईआरएफ को लगभग 15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि आईआरएफ की विदेशी फंडिंग के स्रोतों की व्यापक जांच गृह मंत्रालय कर रहा है। इस बात की जांच भी की जा रही है कि विदेश से किस उद्देश्य से फंड भेजा गया और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
इसके अलावा, इन आरोपों की भी जांच चल रही है कि आईआरएफ को मिले विदेशी फंड का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, लोगों को इस्लाम में शामिल करने और आतंक की तरफ युवाओं को आकर्षित करने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
नदवातुल उलूम, लखनऊ के प्रवक्ता मौलाना सैयद हमजा नदवी ने अलीगढ़ में कहा कि समाज के सभी वर्गो को एकजुट होकर कट्टरपंथ को दूर से प्रोत्साहित करने वालों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले जाकिर नाईक पर आरोप लगाना या दोषी मानना अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर उनसे विचार नहीं मिलते लेकिन उनके उपदेशों में नफरत फैलाने वाले सबूत प्राप्त करना अभी बाकी है।