उत्तर प्रदेश स्थित अमेठी के कोरवा में रूस के सहयोग से 300 मीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम 5 लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों का निर्माण किया जाएगा। केंद्र सरकार ने शनिवार को इसके निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी। अन्य राइफलों के मुकाबले वजन में हल्की होने के साथ-साथ एके-203 चलाने में भी आसान है। ये तीन दशक से ज्यादा समय से पुरानी इंसास राइफल्स की जगह लेंगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा में 7.5 लाख एके-203 राइफलों के सौदे पर हस्ताक्षर होने हैं। इसी सौदे के तहत 5 लाख राइफलों का निर्माण भारत में होगा।
कैलिबर की तुलना में मारक क्षमता अधिक
कैलिबर की तुलना में इसकी मारक क्षमता अधिक है। एके-203 राइफल का इस्तेमाल ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक दोनों तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी रेंज करीब 800 मीटर और मैगजीन 30 राउंड तक है।
तीन दशक से शामिल इंसास की लेगी जगह
7.62 X 39एमएम कैलिबर वाली एके-203 असॉल्ट राइफल तीन दशक से अधिक समय से शामिल इंसास राइफल की जगह लेने वाली है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पहली 70 हजार राइफल की खेप में रूसी कलपुर्जे लगे होंगे। इसके बाद पूरी तरह से यह राइफल स्वदेशी हो जाएगी।