हरियाणा के मेवात जिले में एक प्रेगनेंट बकरी के साथ आठ लोगों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले को दुर्लभतम केस यानी रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में रखने की मांग की गई है। पीपल फॉर द एथिक्ल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पेटा) का कहना है कि स्थानीय पुलिस अपनी चार्जशीट में इस केस को दुर्लभतम नहीं बताती है तो इस मामले को लेकर ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी।
मकसद है कि इस केस के आरोपियों को कम से कम आजीवन कारावास की सजा मिले। चूंकि वह बकरी 50 सप्ताह से प्रेगनेंट थी और उसके पेट में पल रहे बच्चे भी इस घटना में मारे गए हैं, अतः इसके लिए आरोपियों को अलग से सजा देने का प्रावधान है।
पेटा इंडिया इमरजेंसी रेस्पांस कोर्डिनेटर मीत अशहर का कहना है कि बकरी के मालिक असलूप ने 25 जुलाई को नगीना थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि आठ लोगों ने उसकी बकरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है। हालांकि कुछ ही देर बाद बकरी ने दम तोड़ दिया था। स्थानीय पुलिस पहले इस घटना को सामान्य केस मानकर चल रही थी। बाद में जब इस मामले को नूंह की पुलिस अधीक्षक नाजनीन भसीन के संज्ञान में ले लाया गया तो उन्होंने आईपीसी की धारा 377 और 429 के तहत केस दर्ज कराया।
इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ क्रूअल्टी टू एनिमल एक्ट-1960 की भी कुछ धारा भी जोड़ दी गई। पुलिस ने मृतक बकरी के वजाइनल और एनल स्वेब को फोरेंसिक लैब मधुबन भेजा है। एसपी भसीन का कहना है कि हम इस मामले की जांच पूरी संजीदगी से कर रहे हैं। जितने भी सबूत हमारे हाथ लगे हैं, उन्हें और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, इन सब को मिलाकर केस की कड़ियों को जोड़ रहे हैं।
एक बार सभी आरोपी पुलिस के हाथ लग जायें तो उसके बाद पूछताछ से केस लगभग सुलझ जाएगा। हमारा भी प्रयास है कि यह केस दुर्लभतम मामले की श्रेणी में आए। अभी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।
अपराध साबित हुआ तो सिर्फ 50 रुपये जुर्माना
पशु क्रूरता अधिनियम में अपराध सिद्ध होने पर केवल 50 रुपये जुर्माना
अशहर का कहना है कि आईपीसी की धारा 377 में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि यह सजा भी तब मिलती है जब हर सबूत आरोपियों के खिलाफ हो। दूसरी ओर इंडिया प्रिवेंशन ऑफ एनिमल क्रूएल्टी एक्ट-1960 है जो अब पूरी तरह अप्रसांगगिक हो चुका है। इस एक्ट के तहत यदि किसी ने जानबूझकर पशु को मार दिया है और वह उसका पहला अपराध तो है उस पर महज पचास रुपये का जुर्माना किया जाता है।
इस एक्ट में संशोधन के लिए केंद्र सरकार को कई बार लिखा जा चुका है। प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे इस एक्ट मे बदलाव करने की अपील की गई है। बकरी के केस में पेटा का प्रयास है कि आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो, इसके लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी जाएंगे।
कानून के जानकार क्या कहते हैं
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील दीपक त्यागी का कहना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट के ऊपर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। अगर मामला वाकई गंभीर है तो वह ऐसे केस को दुर्लभतम मामले की श्रेणी में डाल सकती है। जहां तक बकरी के केस का सवाल है तो इसमें दुर्लभतम मामला बनता है। पुलिस को खुद ही अपनी चार्जशीट में इसे शामिल करना चाहिए।
अगर पुलिस ऐसा नहीं करती है तो कोई भी एनजीओ या व्यक्ति इस बाबत ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है। बकौल त्यागी, यह केस सीधे तौर पर दुर्लभतम की श्रेणी में आता है, क्योंकि इसमें सामूहिक बलात्कार हुआ है और वह भी गर्भवती बकरी से। कानून में यह भी प्रावधान है कि अगर बकरी के पेट में पल रहे बच्चे यदि जन्म के करीब थे और वे इस घटना में मारे गए हैं, तो इसकी सजा अलग से मिलती है। यह फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा।
पशुओं के साथ क्रूरता के कई मामले
पेटा के पदाधिकारियों का कहना है कि पशु के साथ क्रूरता की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अगर इन केसों में ये आरोपी बच निकलते हैं तो इनका अगला निशाना बच्चे और महिलायें होती हैं। पिछले दिनों मुंबई में एक सुरक्षा गार्ड फीमेल डॉग के यौन शोषण में पकड़ा गया था।
इसके बाद बेंगलुरू में एक महिला ने डॉग के आठ बच्चों को मार दिया। चेन्नई मेडिकल स्टूडेंट ने एक पिल्ले को छत से फेंक दिया था। वेल्लोर मेडिकल कालेज में एक स्टूडेंट ने बंदर को उस समय तक टॉर्चर किया, जब तक वह मर नहीं गया।