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Ghosi Bypoll: सपा के साथ कांग्रेस ने की बड़ी 'डील'! घोसी से चला दांव, अब अखिलेश यादव के अगले कदम पर नजरें

आशीष तिवारी
Updated Mon, 28 Aug 2023 02:53 PM IST

सार

घोसी में 5 सितंबर को होने वाले उपचुनाव से एक साथ कई सियासी तीर निशाने पर लगाए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सियासी तीर कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को कांग्रेस ने समर्थन देकर छोड़ा है। 
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अखिलेश यादव और राहुल गांधी - फोटो : सोशल मीडिया


कई सियासी तीर निशाने पर लगाने की तैयारी

घोसी में 5 सितंबर को होने वाले उपचुनाव से एक साथ कई सियासी तीर निशाने पर लगाए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सियासी तीर कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को कांग्रेस ने समर्थन देकर छोड़ा है। राजनीतिक विश्लेषक अरुण सिंह कहते हैं कि कांग्रेस का समाजवादी पार्टी को समर्थन देना सीधे तौर पर घोसी चुनाव को रोचक बना रहा है। वह कहते हैं कि आज के सियासी परिदृश्य में कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में उतना जनाधार नहीं है जितना की अन्य पार्टियों का है, लेकिन समर्थन देकर कांग्रेस ने एक माहौल बनाने का काम जरूर किया है। अरुण सिंह कहते हैं यह माहौल NDA वर्सेज I.N.D.I.A के तौर पर सामने आया है। घोसी के उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल ने भी समाजवादी पार्टी को समर्थन देकर I.N.D.I.A गठबंधन को इस उपचुनाव में मजबूत किया है। सियासी जानकारों का मानना है कि अब घोसी के उपचुनाव में जो लड़ाई लड़ी जा रही है वह 2024 के लिए तैयार हुए दो बड़े गठबंधनों के बीच की लड़ाई हो गई है।


कांग्रेस को मिल सकता है फायदा

वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर सिंह कहते हैं कि लोकसभा के चुनाव में अगर इसी गठबंधन के सहारे सीटों का बंटवारा होता तो कांग्रेस को मन मुताबिक सीट मिलने का अनुमान न के बराबर ही लगाया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस ने दो बहुत अहम सियासी फैसले किए। दिवाकर कहते हैं पहले तो कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदलकर नए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के साथ उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सियासत को गर्म करने का काम शुरू कर दिया। दूसरा समाजवादी पार्टी को घोसी के उपचुनाव में अपना समर्थन दे दिया। वह कहते हैं कि अब कांग्रेस के पास आने वाले लोकसभा चुनाव में इसी गठबंधन के आधार पर समाजवादी पार्टी के साथ मन मुताबिक तरीके से सीटों के बंटवारे को लेकर खुलकर चर्चा की उम्मीद बढ़ गई है।


राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस ने घोसी में समर्थन देकर एक तरह से समाजवादी पार्टी के साथ वह बड़ी डील की है जिसके आधार पर आगे के कुछ और सियासी फैसले किए जा सकें। इन फैसलों में कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण लोकसभा चुनाव में, अगर इसी गठबंधन के आधार पर चुनाव लड़ा जाता है तो, समाजवादी पार्टी की ओर से छोड़ी जाने वाली सीटें ही होगी। वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर सिंह कहते हैं कि कांग्रेस ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद के उपचुनाव में बहुत सक्रियता नहीं दिखाई। कांग्रेस अब इसी गठबंधन के सहारे अब उत्तर प्रदेश में न सिर्फ बड़ा संदेश देने की तैयारी कर चुकी है बल्कि समाजवादी पार्टी को भी एक तरह से गठबंधन में साथ रहकर आगे के लिए बड़ी साझेदारी का सियासी रोड मैप भी तैयार किया है। 




दिलचस्प होगा घोसी उपचुनाव

घोसी में 5 सितंबर को होने वाले उपचुनाव सिर्फ समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि दोनों दलों के बड़े गठबंधन के लिहाज से भी इसका आंकलन किया जाएगा। सियासी जानकारों का कहना है कि इस चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वाली रणनीति की परीक्षा होगी। वहीं भाजपा के लिए समाजवादी पार्टी छोड़कर गए दारा सिंह चौहान की व्यक्तिगत और भाजपा के सहयोगी दलों की भी परीक्षा होनी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुधाकर सिंह के पुराने राजनेता होने के नाते भी एक परीक्षा मानी जा रही है। 


घोसी उपचुनाव सियासी दलों का लिटमस टेस्ट

राजनीतिक विश्लेषक अरुण सिंह कहते हैं की घोसी का उपचुनाव एक तरह से सियासी दलों के लिए लिटमस टेस्ट जैसा है। इस चुनाव में कांग्रेस जहां अपने परंपरागत सवर्ण वोट को अपने साथ जोड़ने की पूरी सियासी ताकत लगाएगी। वहीं नए बनाए गए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के माध्यम से पूर्वांचल के भूमिहार बिरादरी में भी बड़ी सेंध लगाने की तैयारी करेगी। अरुण सिंह कहते हैं कि पूर्वांचल के खासतौर से मऊ और घोसी क्षेत्र में भूमिहार बिरादरी की संख्या राजनैतिक नजरिए से बहुत प्रभावी मानी जाती है। वह कहते हैं कि सपा के साथ मिलकर कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश तो दिया ही है कि वह गठबंधन को निभाने के लिए न सिर्फ पूरी तरीके से तैयार है बल्कि उत्तर प्रदेश का घोसी चुनाव एक नजीर भी बन गया है। सियासी जानकारों का मानना है कि ऐसा करके कांग्रेस अपने लिए उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का सियासी दांव भी चल रही है।

 
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