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G20: भारत मंडपम के 77 मिनट से दुनिया की 80 फीसदी आबादी को गया यह संदेश; इतनी देर में सध गए सभी समीकरण

आशीष तिवारी
Updated Sat, 09 Sep 2023 02:47 PM IST

सार

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने 77 मिनट के इस स्वागत समारोह में जी 20 में शिरकत करने आए नेताओं से न सिर्फ हाथ जोड़कर अभिवादन किया बल्कि अपनी बॉडी लैंग्वेज से समूची दुनिया में एक बड़ा संदेश भी दिया।
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PM Modi - फोटो : Amar Ujala


इसी तरह आईएमएफ की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा प्रधानमंत्री से मिलीं तो उनके बीच चाहे जो भी बातें हुई हों लेकिन उसके बाद खुलकर लगने वाले ठहाके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बॉडी लैंग्वेज के साथ-साथ हर व्यक्ति से मिलने और उससे बातचीत करने का एक अलग ही अंदाज बयां कर रहे थे। 


विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने 77 मिनट के इस स्वागत समारोह में जी 20 में शिरकत करने आए नेताओं से न सिर्फ हाथ जोड़कर अभिवादन किया बल्कि अपनी बॉडी लैंग्वेज से समूची दुनिया में एक बड़ा संदेश भी दिया। बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्ट भी मानते हैं कि प्रधानमंत्री के 77 मिनट से दुनिया भर की तकरीबन अस्सी फीसदी आबादी में भारत की एक अलग छवि बन गई।


प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार की सुबह भारत मंडपम में 9 बजकर 20 से लेकर 10 बजकर 37 मिनट तक दुनिया भर से आए विदेशी मेहमानों से मुलाकात कर खुद को और भारत को एक अलग मुकाम पर पहुंचा दिया। विदेशी मामलों और डिप्लोमेटिक रिश्तो को करीब से समझने वाले विशेषज्ञ मनमोहन सिंह औजला कहते हैं कि उन्होंने जी 20 की इस बैठक के अलावा दुनिया के अलग-अलग देश की बड़ी बैठकों में शिरकत की है। 


उनका कहना है कि अमूमन यह बैठकें इतनी प्रोटोकॉल और फॉर्मेलिटी के साथ होती रही हैं जिसमें निजता और आत्मीयता का भाव कम ही दिखता आया है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से इस बैठक के पहले दिन शामिल होने वाले प्रत्येक मेहमान का न सिर्फ हाथ जोड़कर स्वागत किया बल्कि किसी से गले मिले तो किसी से उसके व्यक्तिगत सुख-दुख के बारे में भी बातचीत की। उनका कहना है कि यह मौका था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले प्रत्येक मेहमान का स्वागत करते वक्त औपचारिक बातचीत से हटकर बॉडी लैंग्वेज से समुचित दुनिया में आत्मीयता का एहसास कराया। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमूमन जब किसी से मिलते हैं उनके बोलने के साथ-साथ उनकी बॉडी लैंग्वेज बहुत कुछ कह देती है। सेंटर फॉर लिंग्विस्टिक एंड इट्स इंपैक्ट" के नेशनल कन्वीनर जेपी लोढ़ा कहते हैं कि भाषा और बॉडी लैंग्वेज के माध्यम से आप बहुत हद तक लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में अलग-अलग मंचों से लोगों को हमेशा से प्रभावित करते आए हैं। 


उनका कहना है कि किसी भी बड़े मंच पर जब आप लोगों से रूटीन प्रोटोकॉल के दौरान भी निजी तौर पर उनकी समस्याओं या खुशियों के बारे में बात करते हैं तो यह जुड़ाव का मजबूत माध्यम भी बनता है। लोढ़ा कहते हैं जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में अपने चिर परिचित बॉडी लैंग्वेज के एक्सप्रेशन के साथ एक एक मेहमान से मिलकर बातचीत की वह उनकी छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग मुकाम पर पहुंचा रहा था। 
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वह कहते हैं कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मीयता के साथ मेहमानों से मिल रहे थे वह भारत की न सिर्फ संस्कृति को दुनिया के देशों में पहुंचा रहा था बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी एक विशेष पहचान को भी नई ऊंचाइयां दे रहा था।


लोढ़ा कहते हैं कि चाहे जर्मनी के चांसलर हो या विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक। मेक्सिको से शिरकत करने आई उनकी प्रतिनिधि से वहां के राष्ट्राध्यक्ष की सेहत को लेकर बॉडी लैंग्वेज के माध्यम से लिया जाने वाला हाल-चाल तक पता चल रहा था। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ हो रही बातचीत हो या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ स्वागत करते वक्त किया गया वार्तालाप। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बॉडी लैंग्वेज बगैर कहे बहुत कुछ बता रही थी। 


उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस तरह से अपने मेहमानों से मिलना भारत की परंपरा और उनके शिष्टाचार को बताता है। लोढ़ा कहते हैं कि इसका दुनिया के अलग-अलग देश में डिप्लोमेटिक स्तर पर क्या असर होगा यह तो विदेशी मामलों की जानकारी रखने वाले ज्यादा बेहतर बता सकेंगे, लेकिन वह यह जरूर मानते हैं कि निजी तौर पर आत्मीयता हमेशा रिश्तों को और प्रगाढ़ ही करती है। 


विदेशी मामलों की जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से 77 मिनट के दौरान दुनिया भर से आए विदेशी मेहमानों का स्वागत किया उसका आने वाले दिनों में भारत के डिप्लोमेटिक रिश्तों पर जबरदस्त असर पड़ने वाला है। भारतीय विदेश सेवा से जुड़े रहे पूर्व अधिकारी आरएन सिन्हा कहते हैं कि भारत के लिए जी 20 के अध्यक्षता बहुत मायने रखती है। क्योंकि यह वह बड़ा संगठन बनकर तैयार हो गया है जिसमें दुनिया की 80 फीसदी आबादी जुड़ी हुई है। 


सिन्हा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से इस कार्यक्रम के दौरान व्यक्तिगत रूप से एक-एक मेहमान से मिलकर भारतीय परंपरा के अनुसार न सिर्फ उनका स्वागत किया बल्कि निजी तौर पर सबका हाल-चाल लिया उसका व्यापक असर होने वाला है। 


वह कहते हैं कि कहने को तो इसमें अलग-अलग धुरी वाले देश भी शामिल हैं लेकिन जिस तरह से भारत में सभी देशों को बराबर का सम्मान और दर्जा दिया है इसका एक अलग असर पड़ने वाला है। अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष अजाली औसमानी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अफ्रीकी संघ को स्थाई सदस्यता पाने की खुशी में गले लगाया वह दुनिया के 55 देश में भारत को एक नई ऊंचाई दे गया।

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