जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस हेमंत गुप्ता, और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने पिता पेरी कंसाग्रा के पक्ष में दिए उस फैसले को वापस ले लिया, जिसमें उसने बच्चे की कस्टडी को सुरक्षित करने के लिए झूठे और कपटपूर्ण अभ्यावेदन पेश कर अपने पक्ष में फैसला पारित करा लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई को कीनिया के एक नागरिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया जिसने पिछले साल अपने पक्ष में अदालती आदेश प्राप्त करके धोखाधड़ी से अपने 11 वर्षीय बेटे की कस्टडी हासिल की थी। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को बच्चे की कस्टडी सुरक्षित करने और उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया है।
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जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस हेमंत गुप्ता, और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने पिता पेरी कंसाग्रा के पक्ष में दिए उस फैसले को वापस ले लिया, जिसमें उसने बच्चे की कस्टडी को सुरक्षित करने के लिए झूठे और कपटपूर्ण अभ्यावेदन पेश कर अपने पक्ष में फैसला पारित करा लिया था। पीठ ने कहा, 'यह अदालत का कर्तव्य है कि वह अदालत के साथ धोखाधड़ी करके प्राप्त किए गए आदेशों के प्रभाव को हर तरह से रद्द करे।'
पीठ ने कहा कि ठोस तथ्य और यह मानने का कारण है कि पेरी ने बच्चे की कस्टडी पाने के सुनियोजित साजिश रची थी। पीठ ने कहा, ' विदेश मंत्रालय और कीनिया में भारतीय दूतावास को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि बच्चे की कस्टडी हासिल करने के लिए मां को हर संभव सहायता की जाए।'
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पिछले वर्ष 30 अक्टूबर को शीर्ष अदालत के तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने बहुमत(2:1) से दिल्ली की महिला को कीनिया और यूके की दोहरी नागरिकता वाले भारतीय मूल के पिता को बच्चे की कस्टडी सौंपने का निर्देश दिया था। शर्त यह है कि वह लड़के के साथ मां की नियमित मीटिंग कराएगा और उसके हितों की रक्षा के लिए कीनिया से एक 'मिरर ऑर्डर' प्राप्त कराएगा, लेकिन पेरी के आदेशों का पालन नहीं किया।