फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को 'रॉ' बिल्कुल पसंद नहीं थी, रोक दिया था बजट

Thu, 14 Mar 2019 06:40 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विदेशी मामलों के लिए गठित की गई भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग आज देश के लिए काफी अहम बन चुकी है। कोई भी सरकार या प्रधानमंत्री इसे गंभीरता से लेते हैं। केवल एक प्रधानमंत्री ऐसे रहे हैं, जिन्हें 'रॉ' बिल्कुल पसंद नहीं थी। वे एक पल भी इस एजेंसी को देखना तक नहीं चाहते थे। यहां बात हो रही है पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की। 

विज्ञापन


उन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही इस खुफिया एजेंसी का बजट तक रोक दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य मार्शल लॉ एडमिनिस्टेटर जनरल जिया-उल-हक से एक अनौपचारिक बात में यह बता दिया था कि उनकी सरकार पाकिस्तान के बारे में अच्छी तरह से जानती है। परमाणु विकास कहां तक पहुंचा है, हमें सब पता है। ये सब 'रॉ' के हवाले से कहा गया था।

दरअसल, मोरारजी देसाई आपातकाल के बाद प्रधानमंत्री बने थे। इंदिरा गांधी की कई कठोर नीतियां उन्हें भी रास नहीं आई थी। देसाई यही समझते थे कि इंदिरा गांधी ने खुद के राजनीतिक फायदे के लिए 'रॉ' का भरपूर इस्तेमाल किया है। पीएम बनते ही उन्होंने भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी रॉ का बजट इतना कम कर दिया कि वह बंद होने की कगार पर पहुंच गई। नतीजा, एजेंसी की कई अहम गवितिधियां कम होने लगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

मोरारजी देसाई ने रॉ को इंदिरा गांधी का प्रेटोरियन गार्ड(रोमन आर्मी का सिपाही)  बताया था। उन्होंने इस खुफिया इकाई के सूचना प्रभाग को तो बंद ही कर दिया था। रॉ की काउंटर-टेररिज्म डिविजन के पूर्व प्रमुख और प्रसिद्ध सुरक्षा विश्लेषक बी. रमन ने अपने एक लेख में यह जिक्र किया है। मोरारजी देसाई ने पाकिस्तानी जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के साथ टेलीफोन पर हुई एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, 'रॉ' पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियों से अच्छी तरह वाकिफ है।

1977 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर की ओर से अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए भारत को भारी मात्रा में पानी और यूरेनियम बेचने की पेशकश की गई। उन्होंने एक शर्त भी रख थी। वह यह थी कि पहले अमेरिका भारत की परमाणु सामग्री का ऑन-साइट निरीक्षण करेगा। मोरारजी देसाई ने अमेरिका के इस रुख को विरोधाभासी मानते हुए उसे ऐसा करने से मना कर दिया।

देसाई ने पाकिस्तान और चीन के साथ सामान्य संबंधों को बहाल करने का काम किया। जिया-उल-हक के साथ संवाद स्थापित कर मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किए गए। मोरारजी देसाई एकमात्र ऐसे भारतीय नागरिक हैं, जिन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था। 1990 में राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने एक समारोह में उन्हें इस सम्मान से नवाजा था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें