सभापति के छलके थे आंसू और विपक्ष का शोर
सभापति वेंकैया नायडू ने मंगलवार सदन में हुई घटना को लेकर अपनी भावुकता व्यक्त की थी। 10 अगस्त को कांग्रेस के सदस्य प्रताप सिंह बाजवा समेत कुछ सदस्यों ने उच्च स्तर पर हंगामा किया था। वह महासचिव की टेबल पर चढ़ गए थे और रूलबुक को आसन की तरफ उछाल दिया था। इसे लेकर बुधावर को सभापति आहत थे। उन्होंने कहा था कि वह रात को सो नहीं पाए। इसे देश के सभी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से स्थान दिया था। आज राज्यसभा में मानसून सत्र की संसदीय कार्यवाही का आखिरी दिन था। इस बाबत नेता प्रतिपक्ष के दफ्तर में 15 विपक्षी दलों के नेताओं ने बैठक कर रणनीति बनाई। इसमें समाजवादी पार्टी प्रो. राम गोपाल यादव, शिवसेना के संजय राऊत, राजद के प्रो. मनोज झा, तिरुचि शिवा समेत तमाम दलों के नेता शामिल हुए। सरकार के सदन में चर्चा से भागने और सभापति द्वारा चर्चा कराने की अनुमति न देने को लेकर विपक्ष के नेताओं ने संसद परिसर में धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में मार्च करते हुए विपक्षी दल के नेता बोट क्लब तक गए। इसे विपक्ष के नेता काफी गंभीर मसला और लोकतंत्र की हत्या मानते हैं।
राहुल गांधी बुधवार को उपराष्ट्रपति की भावुकता पर भी बोले। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सभापति को सदन चलाना होता है। उन्होंने क्यों नहीं चलाया? उन्हें सदन सुचारु रूप से चलाना चाहिए था। विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए था।
राज्यसभा में हंगामे का वीडियो आया सामने
राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे का वीडियो सामने आया है। सांसदों के हंगामे के दौरान वहां मार्शल मौजूद हैं। वीडियो में सांसदों के साथ हो रही धक्का-मुक्की भी दिखाई दे रही है। इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव, कांग्रेस के सदन में उप नेता आनंद शर्मा, मुख्य सचेतक जयराम रमेश, डीएमके के तिरुचि शिवा समेत अन्य ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात की। उन्हें अपनी शिकायत, मार्शलों के व्यवहार को लेकर चिंता से अवगत कराया। सदस्यों ने चिंता भी जाहिर की कि आखिर इतनी संख्या में सदन के भीतर मार्शल क्यों तैमात थे?
बसपा ने कहा- नहीं देखा कभी संसद में ऐसा व्यवहार
बसपा प्रमुख मायावती ने भी इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मायावती ने कहा कि देश की संसद के उच्च सदन में गत दिनों सत्ता पक्ष, विपक्ष के बीच गतिरोध में जो कुछ हुआ वह अति दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने अपने लंबे संसदीय जीवन में बहुत बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार, तनाव और तीव्र विरोध देखा है, किन्तु संसद में अब जैसा दृश्य कभी नहीं देखा। बसपा इस पूरे प्रकरण में तटस्थ बनी हुई है। वह मुद्दों के आधार पर रुख तय करके चल रही है।
विपक्ष ने लोकतंत्र को शर्मसार किया: भाजपा
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष और खासकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष सड़क को संसद में उठाकर ले आया है। इससे न केवल देश बल्कि लोकतंत्र भी शर्मसार हुआ है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार और गुरुवार को सदन के भीतर तथा बाहर के प्रदर्शन के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि क्या देश का कोई भी नागरिक यह हिंसक हंगामा स्वीकार कर सकता है। जिस तरह से हिंसक प्रदर्शन, हंगामा और अराजकता नजर आई है, ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ।