भारत और चीन बहुत अनोखे हैं। हम दोनों पुरानी सभ्यताएं हैं। यह कहना है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का। शुक्रवार को 'युवाओं के लिए अवसर और वैश्विक परिदृश्य में भागीदारी' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि चीन आज दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गया है तो वहीं हम पांचवें स्थान पर हैं। आने वाले दो या तीन वर्षों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। यही वास्तविकता है। जयशंकर ने बताया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से चीन के साथ सीमा पर बुनियादी ढांचे के लिए भारत का बजट काफी बढ़ गया है। उन्होंने दावा किया कि भारत को 1962 के युद्ध से सबक लेना चाहिए था, लेकिन 2014 तक सीमा बुनियादी ढांचे के विकास में कोई प्रगति नहीं हुई। मोदी सरकार ने इसके लिए बजट 3,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 14,500 करोड़ रुपये किया।
राजनयिक के रूप में हनुमान जी की तुलना
राजनयिक के रूप में भगवान हनुमान को कैसे देखा जा सकता है, इस सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि एक आदर्श राजनयिक पहले अपने स्वामी और देश का पक्ष प्रस्तुत करता है। इस दौरान वातावरण कभी-कभी अनुकूल होता है तो कभी नकारात्मक भी हो जाता है। दबाव के दौरान दूसरे देशों में अपना पक्ष कैसे रखें यही कूटनीति का सर्वोपरी बिंदु है। रामायण में भगवान बजरंगबलि लंका गए थे, उन्होंने वहां चुनौती भरी परिस्थिति में भी भगवान राम का पक्ष मजबूती से रखा।
दुनिया की सोच से भी विपरीत जाकर करने पड़ते हैं फैसले