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मिलावट से निपटने के लिए हमारा कानून पर्याप्त

Mon, 21 Mar 2016 11:32 PM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है
  • उपभोक्ताओं को मिला अधिकार
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‌म‌िलावट - फोटो : FSSAI
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट से बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। सरकार ने इस कानून को कारगर बताया है। दस लाख रुपये जुर्माना और अधिकतम उम्रकैद की सजा के प्रावधान के कारण यह सरकारी नीति कारगर साबित हो रही है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट एक परिपूर्ण कानून है। इसमें हर पहलू पर विचार किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि इस अधिनियम के तहत फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) का गठन किया है। इसके तहत सभी खाद्य पदार्थों के लिए मानक तय किए गए हैं। इसमें फूड बिजनेस ऑपरेटरों पर सामाजिक दायित्व भी निर्धारित किया गया है।

मंत्रालय ने शीर्ष अदालत को यह जवाब एक जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि मिलावटी खाद्य सामग्रियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए कानून का अभाव है। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि मौजूदा कानून का भी प्रभावी तरीके से अनुपालन नहीं हो रहा है।
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सरकार ने कहा कि जनहित याचिका में उठाए गए मसलों को खारिज कर दिया जाना चाहिए। सरकार ने कहा कि मिलावट में दोषी ठहराए जाने के बाद संबंधित अधिकारी या पंचाट को सजा निर्धारित करने को लेकर वृहत अधिकार दिए गए हैं। अगर मिलावटी पदार्थ के सेवन से किसी व्यक्ति की जान चली जाती है तो दोषी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। 
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उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों को जांच-पड़ताल करने का हक

टेस्ट में फ‌िर फेल हुई मैगी - फोटो : Demo
सरकार ने कहा कि मौजूदा कानून के तहत उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों को जांच-पड़ताल करने का हकदार बनाया गया है और आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित अथॉरिटी से इसकी शिकायत कर सकता है। वह मुआवजे की भी मांग कर सकता है।

सरकार ने यह भी कहा कि जनवरी में फूड अथॉरिटी की हुई बैठक में खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों की मात्रा तय करने सहित कई निर्णय लिए गए हैं। एफएसएसएआई ने करीब 202 खाद्य पदार्थों और 98 एंटीबायोटिक्स व वेटनरी ड्रग्स के लिए कीटनाशक की सीमा तय तक की।

सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स रेगुलेशन, 2011 के तहत फलों को कार्बइड गैस से नहीं पकाया जा सकता। उसमें मोम, मिनिरल ऑयल और रंग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। किसानों को इस कानून के दायरे से अलग रखा गया है लेकिन आम सहित अन्य फलों की जांच करना अथॉरिटी का कर्तव्य है। 
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