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कब-कब बना वेतन आयोग, आजादी से और सातवें वेतन आयोग पर एक नजर

Thu, 30 Jun 2016 03:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिश में वेतन में 23.33 फीसदी की बढ़ोतरी भी सरकारी यूनियनों को खटक रही हो, मगर एक समय ऐसा भी था जब चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में महज 10 रुपये की ही बढ़ोतरी हुई थी।
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पहले वेतन आयोग में तब रेलवे के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को महज 10 से 30 रुपये की बढ़ोतरी से संतोष करना पड़ा था। वह भी तब जब आयोग ने न्यूनतम वेतन की सीमा 55 रुपये तय की थी। खासतौर से पांचवें वेतन आयोग ने 13 राज्य सरकारों की नींद उड़ा दी थी। हालात यहां तक पहुंच गए थे कि बिहार, उड़ीसा जैसे राज्यों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं बचे थे।

पहले वेतन आयोग, जिसका गठन जनवरी 1946 में किया गया था और जिसकी रिपोर्ट मई 1947 में सौंपी गई थी, में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को महज 10 रुपये की वेतन वृद्धि से संतोष करना पड़ा था। तब रेलवे के इस श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में 10 रुपये से 30 रुपये तक और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में 35 से 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। पहले आयोग की रिपोर्ट के बाद रेलवे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 55 रुपये तय किया गया था।
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राज्यों की नाराजगी
वेतन आयोग की सिफारिशें समय-समय पर राज्यों को नाराज भी करती रही हैं। दरअसल केंद्र के बाद राज्य भी बारी-बारी से आयोग की सिफारिशें लागू करते हैं और इससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। खासतौर से साल 1994 में बने पांचवें वेतन आयोग ने कई राज्यों की वित्तीय हालत पतली कर दी थी। तब 13 राज्यों ने केंद्र से राज्यों की सलाह के बिना वेतन वृद्धि न करने की मांग कर दी थी।

क्यों बनता है वेतन आयोग
बढ़ती महंगाई और अन्य समस्याओं के निदान के लिए दस साल पर वेतन आयोग गठित किया जाता है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और अन्य सुविधाओं को तात्कालिक वित्तीय परिस्थितियों के अनुरूप करना है।
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अब तक बने वेतन आयोग

आयोग          साल              वित्तीय बोझ 
पहला         जनवरी 1946       0000
दूसरा        अगस्त 1957        40 करोड़
तीसरा         अप्रैल 1970        144 करोड़
चौथा        जून 1983        1282 करोड़
पांचवां        अप्रैल 1994        17000 करोड़
छठा        अक्टूबर 2006    40000 करोड़
सातवां      फरवरी 2014      114000 करोड़
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