प्रधानमंत्री ने कहा,'हम भविष्य के लिए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्रगति, हरित विकास समझौते और 21वीं सदी के लिए बहुपक्षीय संस्थानों को मजबूत करना चाहते हैं। हम तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे भविष्य के क्षेत्रों को अत्यधिक प्राथमिकता देते हैं। हम सामूहिक रूप से लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और विश्व शांति सुनिश्चित करने के लिए भी काम करेंगे।'
उन्होंने कहा कि हमारे सांस्कृतिक लोकाचार में निहित भारत का जी-20 की अध्यक्षता का विषय 'वसुधैव कुटुम्बकम- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' हमारे वैश्विक दृष्टिकोण से गहराई से मेल खाता है कि पूरा विश्व एक परिवार है। उन्होंने कहा,'भारत की जी-20 अध्यक्षता समावेशी, महत्वाकांक्षी, निर्णायक और कार्रवाई उन्मुख रही है। हमने सक्रिय रूप से वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी चिंताओं को उठाया।
यह जिक्र करते हुए कि यह भारत द्वारा आयोजित किया जा रहा पहला जी-20 शिखर सम्मेलन है, उन्होंने कहा कि भारत को प्रतिष्ठित भारत मंडपम में सप्ताहांत में 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की खुशी है। उन्होंने कहा, 'मेरा दृढ़ विश्वास है कि नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन मानव केंद्रित और समावेशी विकास में एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा।'
पीएम मोदी ने कहा कि वह 'एक धरती', 'एक परिवार' और 'एक भविष्य' पर सत्रों की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें विश्व समुदाय के लिए प्रमुख चिंता के कई मुद्दे शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इनमें मजबूत, सतत, समावेशी और संतुलित वृद्धि को आगे बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा कि वह मित्रता और सहयोग के बंधन को और गहरा करने के लिए कई नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
उन्होंने कहा,'मुझे भरोसा है कि हमारे मेहमान भारतीय आतिथ्य की गर्मजोशी का आनंद लेंगे।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को रात्रि भोज का आयोजन करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, '10 सितंबर को नेता राजघाट पर गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उसी दिन जी-20 के नेता एक स्वस्थ 'पृथ्वी' के लिए 'एक परिवार' की तरह एक स्थायी और न्यायसंगत 'भविष्य' के लिए अपना सामूहिक दृष्टिकोण साझा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व बैंक द्वारा तैयार जी-20 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने केवल छह साल में वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इनक्लूजन) के लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, अन्यथा इसमें कम से कम 47 साल लगते। उन्होंने ट्वीट में कहा, 'डिजिटल सार्वजनिक ढांचे द्वारा संचालित वित्तीय समावेशन में भारत की छलांग! विश्व बैंक द्वारा तैयार किए गए जी-20 के एक दस्तावेज में भारत के विकास पर एक बहुत ही रुचिपूर्ण बिंदु साझा किया गया है।'
उन्होंने कहा, 'भारत ने केवल छह साल में वित्तीय समावेशन लक्ष्य हासिल किया है अन्यथा इसमें कम से कम 47 साल लगते। हमारे मजबूत डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे और हमारे लोगों की भावना के लिए बधाई। यह तेजी से प्रगति और नवाचार (इनोवेशन) का भी ही प्रमाण है।' गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि रिपोर्ट में माना गया है कि मोदी सरकार द्वारा निर्मित मजबूत जन धन, आधार और मोबाइल ट्रिनिटी बुनियादी ढांचे ने लाखों लोगों को सशक्त बनाया है।