फिनलैंड के विदेश मंत्रालय में स्थायी सचिव जुक्का सलोवारा इन दिनों भारत में हैं। वे बुधवार को राजधानी दिल्ली में 12वें भारत-फिनलैंड विदेश कार्यालय संवाद में शामिल हुए। आज उन्होंने अपनी भारत यात्रा के उद्देश्यों सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मैं फिनलैंड के विदेश मंत्रालय और भारत के विदेश मंत्रालय के बीच विदेश कार्यालय परामर्श के लिए भारत आया हूं। यह हमारे देशों के बीच एक संवाद के बारे में है। कल दोनों देशों के प्रतिनिधियों में वार्ता से ये साफ हो गया है कि भारत और फिनलैंड के बीच संबंध कितने अच्छे हैं। उन्होंने बताया कि हमारी बैठक में भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा हुई। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध और इस्राइल-हमास संघर्ष शामिल थे।
इस्राइल-हमास पर कही ये बात
फिनलैंड के स्थायी राज्य सचिव जुक्का सलोवारा ने संवाद कार्यक्रम के दौरान वार्ता को लेकर कहा कि हम इस्राइल पर हमास के हमले की कड़ी निंदा करते हैं। पूरे मुद्दे पर फिनलैंड का दृष्टिकोण हमारा यूरोप की तरह ही दृष्टिकोण है। हमारा मानना है कि दो-राज्य समाधान सबसे अच्छा समाधान होगा। वहां नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस दौरान, उन्होंने इस्राइल-हमास युद्ध के बीच भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के भविष्य पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आईएमईसी एक दीर्घकालिक परियोजना है। मुझे विश्वास है कि इन कनेक्टिविटी परियोजनाओं में बहुत सारी संभावनाएं हैं।
भारत-फिनलैंड संबंधों पर कही ये बात
इस दौरान उन्होंने भारत-फिनलैंड संबंधों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खास तौर से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय और फिनलैंड के बीच बहुत संभावनाएं हैं। मैंने पहले ही डिजिटलीकरण का उल्लेख किया है, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा एक ऐसी चीज है। इसके अलावा जैव ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी हम साथ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिनलैंड में भारतीय प्रवासी बढ़ रहे हैं। कई भारतीय वहां आईटी क्षेत्र में काम कर रहे हैं और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में अग्रणी हैं।
नाटो के सदस्य बनने पर कही ये बात
इस दौरान उन्होंने फिनलैंड के आधिकारिक तौर पर नाटो के 31वें सदस्य बनने पर भी टिप्पणी की। जुक्का सलोवारा ने कहा कि हम एक सक्रिय नाटो सदस्य के रूप में खुद को स्थापित करेंगे। हमारी पहले से इसमें शामिल होने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन रूस की आक्रामकता और यूक्रेन पर हमले ने हमारी धारणा बदल दी। फिनलैंड का नाटो में शामिल होना इस स्थिति में एक बहुत ही समझदारी भरा कदम था। हमारे पास एक आक्रामक पड़ोसी है जिसने दूसरे पड़ोसी पर हमला किया है, इसलिए नाटो हमारी सुरक्षा के लिए अच्छा है।
भारत-फिनलैंड विदेश कार्यालय संवाद में इन मुद्दों पर वार्ता
बता दें कि बुधवार को हुए भारत-फिनलैंड विदेश कार्यालय संवाद में भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव संजय वर्मा ने किया था। इस दौरान, द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा सहित आर्कटिक और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार सहित बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। इस दौरान, दोनों पक्ष विदेश कार्यालय संवाद का अगला दौर हेलसिंकी में आयोजित करने पर सहमत हुए।
इस संवाद को लेकर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया था। इसमें कहा गया था कि भारत और फिनलैंड के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं । वर्ष 2024 दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना का 75वां वर्ष होगा और दोनों पक्षों ने इसे शानदार तरीके से मनाने का फैसला किया है।