न्यायमूर्ति नागरत्ना ने सोमवार को कहा कि भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उनकी वित्तीय सुरक्षा के साथ ही निवास की सुरक्षा को संरक्षित रखने और बढ़ाए जाने की जरूरत है।
उन्होंने यह टिप्पणी एक मामले में फैसला सुनाते हुए कही। इस पीठ में न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे, जिसमें कहा गया था कि एक मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। यह प्रावधान सभी विवाहित महिलाओं के लिए है चाहें उनका धर्म कुछ भी हो।
'गृहणी भारतीय परिवारों की रीढ़ हैं'
न्यायाधीश नागरत्ना ने अपने 45 पन्नों के फैसले में कहा, ‘भारतीय महिलाओं की 'वित्तीय सुरक्षा' के साथ ही 'निवास की सुरक्षा' दोनों को संरक्षित और बढ़ाना होगा। यह वास्तव में ऐसी भारतीय महिलाओं को सशक्त बनाएगा जिन्हें 'गृहिणी' कहा जाता है और जो भारतीय परिवार की ताकत और रीढ़ हैं, जो भारतीय समाज की मूलभूत इकाई है जिसे बनाए रखना और मजबूत करना है।’
उन्होंने कहा कि यह कहने की जरूरत नहीं है कि एक स्थिर परिवार, जो भावनात्मक रूप से जुड़ा और सुरक्षित है, समाज को स्थिरता देता है क्योंकि परिवार के भीतर ही जीवन के अनमोल मूल्य सीखे और बनाए जाते हैं।
'मजबूत राष्ट्र के लिए महिलाओं का सम्मान जरूरी है'
उन्होंने आगे कहा कि ये नैतिक मूल्य हैं जो आने वाली पीढ़ी को विरासत में मिलते हैं जो एक मजबूत भारतीय समाज के निर्माण में काफी मदद करेंगे जो कि समय की मांग है। यह एक मजबूत भारतीय परिवार और एक मजबूत राष्ट्र के लिए का निर्माण करेगा। लेकिन ऐसा तभी संभव है जब परिवार में महिलाओं का सम्मान हो और उन्हें सशक्त बनाया जाए।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने खासकर उन विवाहित महिलाओं की असुरक्षा की ओर ध्यान दिलाया, जिनके पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है या घरों में मौद्रिक संसाधनों तक उनकी पहुंच नहीं है।