महान क्रांतिकारी शहीद भगतसिंह हिन्दुस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के भी हीरो हैं। लाहौर में रह रहे वकील इम्तियाज रसीद कुरैशी, जिन्होंने भगतसिंह मेमोरियल फांउडेशन पाकिस्तान, नाम से एक संगठन बना कर रखा है, उन्होंने पाकिस्तान सरकार से भगतसिंह को सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-हैदर से नवाजे जाने की मांग की है।
इस बाबत कुरैशी ने पाकिस्तान सरकार के साथ पत्राचार भी शुरू किया है। फिलहाल इम्तियाज ने पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट में भगतसिंह को गलत तरीके से फांसी दिए जाने के फैसले को चुनौती दे रखी है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर सुनवाई भी शुरू कर दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत से पांच जजों की एक बैंच गठित करने की मांग की है।
भगतसिंह, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की सीमाओं से परे हैं...
रसीद कुरैशी बताते हैं कि शुरू में जब उन्होंने भगतसिंह मेमोरियल फांउडेशन पाकिस्तान की स्थापना की तो कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध भी किया। कट्टरपंथी कहते थे कि भगतसिंह का मामला हिन्दुस्तान देखे। पाकिस्तान में यह संगठन खड़े करने की कोई वाजिब वजह नहीं है। कुरैशी ने इन सब बातों को दरकिनार कर न केवल संगठन खड़ा किया, बल्कि भगतसिंह का केस भी दोबारा से खुलवाया। उनका कहना है कि भगतसिंह हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं से परे है।
भगतसिंह ने आजादी की लड़ाई में जब अपनी शहादत दी, उस वक्त तो केवल एक ही देश था। उस महान क्रांतिकारी की टोली ने केवल आजादी की लड़ाई लड़ी थी। भगतसिंह की शहादत आज हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों देशों के लिए बराबर सम्मान एवं गौरव का विषय है। पाकिस्तान में आज की नई पीढ़ी भगतसिंह को बखूबी समझने लगी है। भगतसिंह के जन्मदिवस और पुण्यतिथि पर यहां भी सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं। सेंट्रल लाहौर में भगतसिंह की प्रतिमा लगाने की योजना अंतिम चरण में है।