चंद्रशेखर आजाद एक ऐसा नाम है जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक पूरे युग का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं चंद्रशेखर आजाद के वंशज उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक इलेक्ट्रिक की दुकान चलाकर अपना जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं। लेकिन परिवार के लोगों में देशभक्ति का वह जज्बा आज भी बरकरार है जिसके बल पर आजाद ने इस देश को आजादी दिलाई थी। चंद्रशेखर आजाद की भूमिका को आगे बढ़ा रहे उनके वंशज अमित आजाद (35 वर्ष) का कहना है कि वे गुजर-बसर के लिए मोटर बाइंडिंग और घरों में लाइटिंग करने का काम करते हैं। लेकिन जैसे ही समय मिलता है, वे युवाओं को देश के लिए प्रेरित करने के मिशन पर निकल पड़ते हैं। इसी को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।
चंद्रशेखर आजाद के चाचा रामभरोसे तिवारी के बेटे महावीर तिवारी के पुत्र सुजीत आजाद तिवारी और उनके (सुजीत आजाद तिवारी) के पुत्र अमित आजाद का कहना है कि उन्होंने कभी कोई सरकारी सहायता नहीं ली। वे कोई सरकारी सुविधा नहीं चाहते। क्रांतिकारियों के परिवार को मिलने वाली सरकारी पेंशन दिए जाने की पेशकश उनके परिवार को की गई थी जिसे ससम्मान परिवार ने इनकार कर दिया। अमित आजाद ने कहा कि वे अपना कर्तव्य पूरा करना चाहते हैं, अधिकारों की बात उनके लिए दूसरे नंबर की चीज है।