खेत में किसान निराश (फाइल फोटो)
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उत्तर प्रदेश के ललितपुर में खाद संकट के बीच दो किसानों के जान गंवाने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आज (शुक्रवार) मृतक किसानों के परिजनों से मिलने पहुंची। इससे प्रदेश में खाद संकट को लेकर मुद्दा गरमा गया है। प्रियंका गांधी ने कहा कि किसान विरोधी यह सरकार किसानों की समस्याओं को नहीं सुन रही है। लखीमपुर खीरी कांड के बाद जनपद में खाद को लेकर किसानों का विरोध सरकार के लिए मुसीबत बनती जा रही है। खाद के मुद्दे पर हो रही सियासत में सपा और बसपा के अलावा किसान संगठन भी सरकार को घेरने में लगे हैं।
हालांकि खाद संकट की समस्या अकेले यूपी की नहीं है। बल्कि देश के कई हिस्से में यह समस्या किसानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन रही है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित कई राज्यों के किसानों ने पिछले कुछ हफ्तों में उर्वरक की कमी की शिकायत की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रबी फसल के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमपीओ) की कमी हो गई है। केंद्र और राज्य सरकारें जमाखोरी पर नकेल कसने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाल रही है। मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र ने रेलवे से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में उर्वरकों की ढुलाई करने वाले रैक की संख्या बढ़ाने को कहा है। इस महीने की शुरुआत में, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने सभी उत्पादक कंपनियों को मौजूदा रबी सीजन के दौरान डीएपी और अन्य उर्वरकों की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं करने का निर्देश दिया था।
बिजनौर में किसान (फाइल फोटो)
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डीएपी इतना महत्वपूर्ण क्यों?
रबी फसलों के लिए एक बुनियादी पोषक तत्व होने के कारण, सरसों और गेहूं जैसी फसलों की बुवाई के समय डीएपी उर्वरक का छिड़काव करना पड़ता है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ जमीन की बुवाई के लिए उन्हें कम से कम 45 किलो के एक बैग की जरूरत होती है। इसकी आपूर्ति में किसी भी तरह की देरी फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए, इसकी कमी होने पर उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के किसान अधीर होने लगे हैं। किल्लत की खबर फैलने पर किसान खाद खरीदने के लिए दुकानों की ओर दौड़ रहे हैं।
कमी की वजह क्या
कुछ समय पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्वीकार किया है कि डीएपी की "मामूली कमी" है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा "डीएपी उर्वरक की थोड़ी कमी है क्योंकि हम इसे आयात करते हैं और कीमतें भी बढ़ गई हैं। पिछले सीजन में जब डीएपी की कीमतें बढ़ी थीं, तो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों पर बोझ कम करने के लिए इसे 1,200 रुपये प्रति बैग की रियायती दर पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। अब, वैश्विक स्तर पर कीमतों में वृद्धि हुई है और यह निर्णय लिया गया है कि उर्वरक 1,650 रुपये प्रति बैग की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उर्वरकों और फसल के पोषक तत्वों के लिए कच्चे माल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें पिछले 18 महीनों से बढ़ रही हैं। इनमें से अधिकांश उर्वरकों की कीमतों में 50 फीसदी से अधिक की उछाल देखी गई है, जिससे सरकार को सब्सिडी बढ़ाना पड़ा है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश एक तिहाई खाद आयात करता है। चीन, डीएपी का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
गोरखपुर खाद कारखाना।
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जानकार बताते हैं कि देश के पास डीएपी आयात करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है क्योंकि लगभग दशकों पहले, खाद बनाने के छह संयंत्रों को बंद कर दिया गया था। एक कृषि सुधारक के मुतबाकि सरकार को लगा कि डीएपी के उत्पादन की तुलना में आयात करना सस्ता है, इसलिए कई संयंत्र बंद कर दिए गए।
कंपनियां धीमी गति से माल खरीद रहीं
हालांकि सरकार ने 28,602 करोड़ रुपये अतिरिक्त सब्सिडी की घोषणा की है, फिर भी खाद बनाने वाली कंपनियां धीमी गति से खाद खरीद रही है। कमोडिटी ट्रेडिंग फर्म कॉमट्रेड के अशोक अग्रवाल के मीडिया को दिए बयान के मुताबिक " उच्च वैश्विक दरों के कारण कंपनियों को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ रही है, इसलिए खरीद टालना पड़ रहा है, जिससे खाद की कमी हो रही है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत को खाद का आयात बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि स्टॉक कम चल रहा है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक सतीश चंदर ने इंडियन जर्नल ऑफ फर्टिलाइजर्स के ताजा अंक में लिखा है "अप्रैल-जुलाई 2021 के दौरान यूरिया का 7.89 मिलियन टन और डीएपी 1.11 मिलियन टन उत्पादन हुआ है, जिसमें अप्रैल-जुलाई 2020 के मुकाबले क्रमश: 3.9 फीसदी और 12.3 फीसदी की गिरावट आई है।"
यूपी में कितना गहरा खाद संकट
रबी सीजन से पहले खाद स्टॉक की कमी ने उत्तर प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जबकि गेहूं, जौ, मटर, चना और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई के मद्देनजर खाद की मांग बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कृषि विभाग ने दूसरे राज्यों और नेपाल से लगने वाले सहारनपुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, जीबी नगर, गाजियाबाद, लखीमपुर खीरी और बहराइच समेत 41 जिलों के जिलाधिकारियों को 24 अक्टूबर को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि राज्य खाद संकट से जूझ रहा है।
खाद-सांकेतिक
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अवैध व्यापार रोकने का निर्देश
अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) देवेश चतुर्वेदी ने इन जिलों के अधिकारियों को शीर्ष 100 खुदरा विक्रेताओं को चुनने और यह जांचने के लिए कहा है कि क्या वे खाद पड़ोसी राज्य या सीमा पार के किसानों को बेच रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से उन खुदरा विक्रेताओं और व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए भी कहा है जो भूमि रिकॉर्ड दिखाए बिना खाद खरीद रहे हैं और "अवैध व्यापार" कर हैं।
कृषि विभाग ने यह भी कहा कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पैनी नजर रखने के लिए डीएम पुलिस और राज्य जांच ब्यूरो की मदद ले सकते हैं और खाद के "अवैध" व्यापार में लगे व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। सीमाओं पर पुलिस चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की एक मोबाइल टीम को छापा मारने के अलावा अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए कहा गया है। इस महीने की शुरुआत में ही, कृषि विभाग ने जिला अधिकारियों से थोक स्टॉकिस्टों को खाद की जमाखोरी से रोकने के लिए कहा था, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर खाद की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
हालांकि यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने 27 अक्तूबर को एएनआई से बातचीत में कहा था कि राज्य में यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं है। जिलों से मांग के अनुसार उन्हें खाद दिया जाता है। उन्होंने कहा कुछ दिन पहले मैंने केंद्रीय उर्वरक मंत्री से बात की, उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि फास्फेट उर्वरकों खासकर डीएपी की कोई कमी नहीं होगी।
हरियाणा में किसान और पुलिस के बीच झड़प (फाइल फोटो)
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हरियाणा में डीएपी की 'कमी' बड़ा मुद्दा
हरियाणा में डीएपी की भारी कमी ने किसानों को हताश कर दिया है। किसानों के पुलिस पर पथराव करते हुए, खाद की कमी के विरोध में सड़कों को अवरुद्ध करने और यहां तक कि दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में एक निजी डीलर के आउटलेट से खाद को "लूटने तक की" खबरें आ रही है। हालांकि सरकार अब तक उर्वरक की "कमी" से साफ तौर पर इनकार कर रही है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स बता रहे हैं कि किसानों को खाद पुलिस कर्मियों की कड़ी निगरानी में राज्य के पुलिस थानों से वितरित किया जा रहा है।
खासतौर पर दक्षिण हरियाणा के किसान डीएपी की कमी से ज्यादा परेशान है क्योंकि यह इलाका सरसों की फसल की खेती के लिए जाना जाता है। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) हरियाणा इकाई के सचिव बलबीर सिंह ठाकन ने मीडिया को दिए बयान में आरोप लगाया कि यह समस्या सरकार की ओर से कुप्रबंधन का नतीजा है। उनके मुताबिक केंद्र सरकार ने देर से खाद का आयात किया जिस वजह से इसकी कमी हो गई है।
हरियाणा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने बुधवार को कहा कि राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी और उन्होंने किसानों से धैर्य रखने का आग्रह किया। दलाल ने कहा कि राज्य में अगली रबी फसल 2021-22 के दौरान लगभग तीन लाख टन डीएपी उर्वरक की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
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पंजाब
खाद संकट के कारण यहा के किसान बहुत चिंता में है, क्योंकि सरसों की बिजाई के लिए अब महज चंद दिन बचे हैं, लेकिन खाद की कमी की कारण बिजाई का काम महज पचास फीसदी ही पूरा हो पाया है। पंजाब के किसानों का कहना है कि उन्हें लेबल मूल्य से ऊपर कुछ पोषक तत्व खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में रबी फसलों के लिए डीएपी की कुल आवश्यकता 5.50 लाख टन है। इसमें से 4.80 लाख टन गेहूं की फसल की समय से बुवाई के लिए अक्टूबर और नवंबर के दौरान ही जरूरी है।
पिछले हफ्ते पंजाब के कृषि मंत्री रणदीप सिंह नाभा ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से मुलाकात की थी और राज्य में उर्वरकों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि अगर आगामी सीजन के लिए प्रदेश में आवश्क उर्वरक नहीं मिला तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
मध्यप्रदेश में भी मुसीबत
मध्यप्रदेश में भी खाद संकट गहरा रहा है। अशोकनगर के एक किसान ने खाद संकट के चलते कीटनाशक पीकर जान दे दी। इससे पहले, गुना और अशोकनगर में खाद की मांग के साथ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर प्रशासन ने लाठीचार्ज किया था। राज्य भर के किसान डीएपी की आपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
प्रदेश में उपचुनाव के कारण कांग्रेस खाद की कमी को मुद्दा बना रही है और इसे लेकर राजनीति तेज हो गई है। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया है कि प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार डीएपी, यूरिया, एनपीके की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। प्रदेश के विभिन्न स्थान पर 32 अतिरिक्त रैक 30 अक्टूबर तक पहुंचेंगे। यह यूरिया किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।